
महाप्रलय तान*

GRNews Network YouTube news chainal* kavi,sukhamangal singh
कवि कुछ ऐसा तान सुनाओ,
जिससे उथल-पुथल मच जाये।
नाश! नाश! हाँ महाप्रलय महानाश,
की आँखें प्रलयंकारी की खुल जाये।
शंखनाद से धरती डोले,
अंबर का सीना हिल जाये।
शब्दों में शोले भर लाओ,
सुस्त लहू फिर खौल जाये।
सोया भारत जागे फिर से,
जन-जन में ज्वाला जल जाये।
टकसालों के ताले टूटें,
सिंहासन डगमग हो जाये।
झोपड़ी का दीया बन ज्वाला,
महलों तक लपटें ले जाये।
मंगल की हुंकार सुनो अब,
विपदा का मेला मिट जाये।
– सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी







