♦इस खबर को आगे शेयर जरूर करें ♦

संघ हम सबके उपासना का केन्द्र है- सुभाष**

GRNewsNetwork & YouTube news chainal, Beuro chief,Chandra Kumar tiwari*

गाजीपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गाजीपुर द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त निश्चित कार्यक्रमों के क्रम में प्रमुख जन गोष्ठी मे संघ द्वारा समाज परिवर्तन के पंच प्रण में पंचमुखी विकास योजना, सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध स्वदेशी, नागरिक कतर्व्य, कार्य का विस्तार, कार्य की गुणवत्ता, सामाजिक परिवर्तन, विमर्श, सज्जन शक्ति जैसे दस बिन्दू पर आधारित विषय व संवाद कार्यक्रम का आयोजन जिला पंचायत सभागार में सांयकाल किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रप्रचार प्रमुख सुभाष जी व जिला संघचालक जयप्रकाश, नगर संघचालक सर्वजीत ने संयुक्त रूप से भारत माता व डा. केशव बलिराम हेडगेवार, सदाशिव राव गोलवरकर गुरूजी की चित्र पर माल्यापर्ण कर दीपप्रज्जवलित किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ राष्ट्रगीत वन्दे मातरम से हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सुभाष ने बताया कि संघ का शताब्दी वर्ष चल रहा है 101वां वर्ष गत वर्ष से मना रहे है, इस सौ वर्ष की यात्रा सहज व समान्य नही थी। संघ के जीवन मे उपहास व आपातकाल जैसे परस्थितियो को झेला है, बन्धुओ इस सौ साल में कितने पड़ाव आये और कितने झेलने पड़े। संघ हम सबके उपासना का केन्द्र रहा है। प्रारम्भ से ही यह कहा है कि संगठित रहेगे तो ठीक रहेगे। महाराज विभिषण लंकापति रावण को समझाया कि सीता को वापस कर दिजिए और अपने सुन्दर रूप को दिखाये, महाबीर हनुमान ने रामभक्त विभिषण के भवन के छोड़ पूरे लंका में आग लगा दिया। कहा जाता है कि जहा सुमति वहा सम्मत नाना, जहा कुमति वहा संकट नाना, मंदोदरी ने भी रावण को समझाया था लेकिन उसकी एक नही मानी विभिषण को लात मारके भगा दिया। संघ का प्रयोजन भी भारत है, हम अपने मातृभाषा के साथ साथ अन्य भाषाओ का भी ज्ञान रखे, अंग्रेजी, फैंच, जर्मन, जापानी, उर्दू भाषाओ का भी शिक्षा के रूप अपनाना चाहिए इससे ज्ञान बढ़ता है, अन्य संस्कृति का ज्ञान उनके भाषा से ही प्राप्त होती है। हम विश्व गुरू की परिकल्पना को लेकर चल रहे है सन् 1898 मे शिकागो से लौटे स्वामी विवेकानन्द ने कहा कि दर्शन बड़ा, की ज्ञान बड़ा, गुरू से पुछा तो उन्होने चार दिन का समय लिया। उन्होने बताया कि ज्ञान वही समाप्त हो जाता है जहा व्यवहार मे कोई दोष हो जाये, कितना भी ज्ञानी आप हो जाईये आपके व्यवहार में कोई दोष निकल जाये तो आपके सारे ज्ञान धरे धरे रह जायेगे। विवेकानन्द ने तीन काम पर जोर देने की बात किया, भारत के समाज को संगठित करना, सुमति कुमति, व्यक्ति निर्माण करना, चिन्तन स्मृतियां भगवत गीता मे है। भारत मे तीन एम मार्क्स, माईकाले व मिल थे, जो भारती की सभ्यता, संस्कृति, शिक्षा पर कुठाराघात किया। भारत हमारी हस्ति और यही हमारी शक्ति है, तन से, मन से, धन से राष्ट्रदेव की आराधना करे। सन् 1925 से राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ संगठन पूरे विश्व मंे खड़ा किये और 32 से अधिक संगठन चल रहे है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन मे एक घंटा नित्य की शाखा मे कोई भी आये तो उसे संगठन के बारे मे सबकुछ धीरे धीरे ज्ञात हो जायेगा। शाखा गंगा की धारा है सारे हिन्दू भाई चुनौतियों का संकल्प लेते है। हमे नायक चाहिए जिसे समाज पर विश्वास है। रविन्द्रनाथ ठाकुर और स्वामी विवेकानन्द जी भी कहते है। इस कालखण्ड मे सरकार सेना से मिलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काम करता है। अगले क्रम में संवाद कार्यक्रम में प्रश्नो के माध्यम से सुभाष जी ने सभी की जिज्ञासा को शान्त किया। संवाद कार्यक्रम के पश्चात पंच प्रण सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध स्वदेशी, नागरिक कतर्व्य, कार्य का विस्तार, कार्य की गुणवत्ता, सामाजिक परिवर्तन, विमर्श, सज्जन शक्ति के जागरण पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। इस अवसर पर जिला प्रचारक प्रभात, एवं गाजीपुर के प्रत्येक क्षेत्र के गणमान्य सज्जन शक्ति उपस्थित रहे। अतिथियों का परिचय नगर कार्यवाह हर्ष ने तथा मंच संचालन सेवा प्रमुख अनुज राय ने किया। सम्पूर्ण जानकारी जिले के प्रचार प्रमुख चंद्र कुमार तिवारी ने दिया

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now
               
हमारे  नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट , और सभी खबरें डाउनलोड करें
डाउनलोड करें

जवाब जरूर दे 

आप अपने सहर के वर्तमान बिधायक के कार्यों से कितना संतुष्ट है ?

View Results

Loading ... Loading ...


Related Articles

Close
Close
Website Design By Bootalpha.com +91 84482 65129
[news_reels]