*अब नहीं रहे भोजपुरी के जाने-माने गीतकार वंश नारायण सिंह मनज*

G R News एडिटर इन चीफ वेद प्रकाश श्रीवास्तव
गाजीपुर 8 अप्रैल ।भोजपुरी के जाने माने गीतकार वंश नारायण सिंह ‘मनज’ का निधन 95 वर्ष की उम्र में हृदयगति रुकने से आज 8 अप्रैल 2014 ई0 को हो गया। मनज जी का जन्म 20 जुलाई 1933 ई0 को उनके पैतृक निवास गगरन (दिलदारनगर) में हुआ था। हिंदी तथा अंग्रेजी विषयों में एम0 ए0 की शिक्षा प्राप्त मनज जी लंबे समय तक राधा कृष्ण आदर्श इंटर कॉलेज दिलदारनगर में एक लोकप्रिय भाषा शिक्षक के रूप में अध्यापन करने के बाद वर्षों से अवकाश ग्रहण करने के बाद अपने दिलदारनगर स्थित मकान में बेटी वंदना के साथ रह रहे थे। वैसे तो ये वर्षों से बीमार चल रहे थे। आज 8 अप्रैल को स्थिति विशेष बिगड़ जाने के कारण उपचारार्थ सासाराम (बिहार) के एक निजी अस्पताल में ले जाये गये। वहां जैसे ही उपचार प्रारम्भ हुआ, वैसे ही अपराहन 12:40 बजे देहावसान हो गया। निधन के बाद शव को उनके वर्तमान निवास स्थल दिलदारनगर में लाकर रखा गया है। अंतिम संस्कार अगले दिन में लगभग 8:00 बजे जमानिया स्मशान घाट पर किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मनज जी जब तक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे, कविसम्मेलनों एवं काव्यगोष्ठियों के सुकुमार कवि के रूप में अपने गीत एवं स्वर लहरी से श्रोताओं को क ई दशक तक रससिक्त करते रहे। इनकी कृति है ‘लिखे कोइलरिया पिरीतिया के पाती’। इनके निधन से साहित्य जगत की अपूर्णिय क्षति हुई है। जनपद के हम सभी साहित्यकार उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए परम सत्ता से अपेक्षा करते हैं कि उनकी आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार के ऊपर जो संकट आया है, उसका सामना करने की उन्हें शक्ति मिले।

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