
*चितौरा में मनरेगा भुगतान पर उठे सवाल, 235 श्रमिकों की हाजिरी की जांच की मांग* ** **शिकायत के निस्तारण को लेकर एडीओ कॉपरेटिव से शिकायतकर्ता की फोन पर हुई बातचीत का दावा, स्वतंत्र जांच की उठी मांग**

, *GRNews Network & YouTube news chainal editor in chief Ved prakash Srivastava
गाजीपुर। देवकली विकासखंड की ग्राम पंचायत चितौरा में मनरेगा कार्यों को लेकर की गई शिकायत अब निस्तारण प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रही है। करीब 235 श्रमिकों की कथित फर्जी हाजिरी, मास्टर रोल में अनियमितता और भुगतान में गड़बड़ी के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की मांग के बीच शिकायतकर्ता और एडीओ कॉपरेटिव के बीच फोन पर हुई कथित बातचीत का मामला सामने आया है।
शिकायतकर्ता कमलेश कुमार के अनुसार, शिकायत के निस्तारण के संबंध में एडीओ कॉपरेटिव ने उनसे फोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान शिकायतकर्ता ने सवाल किया कि यदि अधिकारी स्वयं जांच के दौरान मौके पर गए थे तो उन्हें धरातल की स्थिति की जानकारी होनी चाहिए। इस पर एडीओ कॉपरेटिव ने कथित तौर पर कहा कि मामले की जांच पहले डीसी मनरेगा कर चुके हैं।
शिकायतकर्ता ने जवाब दिया कि उन्हें पूर्व जांच की कोई सूचना नहीं मिली। बातचीत के संबंध में शिकायतकर्ता का दावा है कि एडीओ कॉपरेटिव ने यह भी कहा कि वे अपने उच्चाधिकारी के खिलाफ नहीं जा सकते। हालांकि, शिकायतकर्ता के अनुसार बातचीत में भुगतान में गड़बड़ी होने की बात भी स्वीकार किए जाने का दावा किया गया है। इस कथित बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
वहीं, स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पूर्व में डीसी मनरेगा स्तर से चितौरा में जांच के लिए टीम पहुंची थी और ग्राम प्रधान से भी मुलाकात हुई थी। हालांकि, जांच के बाद क्या रिपोर्ट बनी, क्या कार्रवाई हुई और किन बिंदुओं पर जांच की गई, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं हो सकी। इसके बाद संबंधित कार्य का भुगतान भी हो जाने की बात सामने आ रही है।
मामले को लेकर ग्राम प्रधान की ओर से पत्रकारों के सामने पूर्व में दिए गए कथित बयान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रधान ने अधिकारियों के संबंध में यह कहते हुए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था कि “डीसी, डीडीओ, बीडीओ सब खुश हैं, मेरा कोई कुछ नहीं कर सकता।” हालांकि, इस कथित बयान की भी स्वतंत्र पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में चितौरा पिच रोड से रामाश्रय के खेत तक चकबंध निर्माण तथा रामबचन के खेत से सर्वण के खेत तक चकबंध कार्य में मास्टर रोल में दर्ज करीब 235 श्रमिकों की वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन कराने की मांग की है। साथ ही जॉब कार्ड, आधार से संबंधित अभिलेख, मस्टर रोल, बैंक भुगतान और मौके पर हुए कार्य का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है।
डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग
पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पूर्व में जांच हुई थी तो उसकी रिपोर्ट क्या रही, जांच के आधार पर क्या कार्रवाई हुई और भुगतान किस आधार पर किया गया। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से चितौरा ग्राम पंचायत में हुए मनरेगा कार्यों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ ही पूर्व जांच में शामिल अधिकारियों की भूमिका और जांच के बाद हुई कार्रवाई की भी समीक्षा कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच केवल अभिलेखों तक सीमित न रहे, बल्कि मौके पर जाकर श्रमिकों से पूछताछ, मस्टर रोल का सत्यापन, कार्य की वास्तविक माप और भुगतान से जुड़े अभिलेखों का मिलान कराया जाए। यदि जांच में अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और धनराशि की वसूली की जाए।
फिलहाल चितौरा में मनरेगा कार्यों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कथित फोन बातचीत और पूर्व जांच के संबंध में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।








