
साकेत साहित्य यात्रा में उत्कृष्ट सृजन से सुखमंगल जी ने भारतीय संस्कृति व साहित्य को उजागर किया* – रेनू मिश्रा “दीपशिखा

“GRNews Network Brodcast center editor in chief ved Parkash Srivastava
प्रयागराज। सरजू तक नामक कृति की समीक्षा करते रेनू मिश्रा जी कहती हैं कि सुखमंगल जी हिन्दी साहित्य के वरिष्ठ कवि,लेखक होने के साथ साथ एक महान आलोचक भी है।आपकी काव्य संग्रह “सरयू तट से” व “सुपाठय काव्य सरिता” प्रकाशित हो चुकी है। ‘साकेत साहित्य यात्रा ‘ में अयोध्या क्षेत्र के सुंदर संदर्भ प्रस्तुत किया है। वाराणसी लोक परम्परा के सुंदर दिग्दर्शन होते हैं।जीवन का सबसे बड़ा सत्य,भीतर का तुफान, विज्ञान युग, तथा मृत्यु की पीड़ा कविताएं अत्यंत हृदय स्पर्शी हैं।
आपकी रचनाओं में समाज,देश व राष्ट्र के प्रति चिंतन तथा समर्पण का भाव दृष्टिगोचर होता है। निश्चित रूप से यह काव्य संग्रह पाठकों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। मानवीय संवेदना को प्रस्फुटित करती ये रचनाएं साहित्य जगत में विशेष स्थान प्राप्त करेगी। ईश्वर की असीम कृपा से आपकी लेखनी उत्तरोत्तर समृद्धि प्राप्त करे।इसी शुभ मंगलकामना के साथ —
रेनू मिश्रा “दीपशिखा”
शिक्षिका
खेलगांव पब्लिक स्कूल प्रयागराज उत्तर प्रदेश , भारत








