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*महाकुंभ के विराट प्रबंधन को दस्तावेजी स्वरूप देने वाली पुस्तक का हुआ विमोचन

GRNews Network Broadcast center* editor in chief ved Parkash Srivastava

लखनऊ, 20 जून। महाकुंभ 2025 में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भागीदारी के दौरान हुए सटीक प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय और व्यवस्था के संचालन को किताब की शक्ल दी गई है। “महाकुंभ 2025, श्रद्धालु 66 करोड़ के पार” किताब का शनिवार को होटल ताज में विमोचन किया गया। इस अवसर पर पटना हाई कोर्ट के जज संजय कुमार सिंह समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों की उपस्थिति रहे।

प्रयागराज निवासी डॉ. गोविंद कुमार सक्सेना द्वारा लिखी गई इस पुस्तक में महाकुंभ को केवल एक धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, प्रशासनिक दक्षता और सामाजिक सहभागिता के अद्भुत संगम के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, तकनीकी उपयोग तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने कहा कि महाकुंभ भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। ऐसे ऐतिहासिक आयोजनों का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री का कार्य करता है। उन्होंने पुस्तक के माध्यम से महाकुंभ के विभिन्न आयामों को संकलित किए जाने की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध कवि तथा लॉ प्रोफेसर डॉ. श्लेष गौतम द्वारा किया गया।

इसके अलावा अध्यक्षीय अतिथि एवं आयुक्त, लखनऊ मंडल विजय विश्वास पंत, अति विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (न्याय) एवं विधिक परामर्शी उदय प्रताप सिंह, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व संपादक रतन मणि लाल समेत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पंचदशनाम जूना अखाड़ा, महाशक्ति पीठ कल्याणपुर, कानपुर के अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर श्री मां योग योगेश्वरी यति जी और मानद अतिथि एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता हिमांशु शेखर उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम के अध्यक्षीय अतिथि, आयुक्त, लखनऊ मंडल, श्री विजय विश्वास पंत (आईएएस) ने कहा, “महाकुंभ 2025 से यह सिद्ध हुआ कि जब सुशासन, टेक्नोलॉजी और जनसहयोग एक साथ कार्य करते हैं तो असंभव लगने वाले लक्ष्य भी सफलतापूर्वक प्राप्त किए जा सकते हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं के सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित अनुभव के पीछे हजारों कर्मियों और विभिन्न विभागों का साझा प्रयास था। डॉ. गोविंद कुमार सक्सेना ने अपनी पुस्तक में महाकुंभ के व्यवस्थागत, सामाजिक और आध्यात्मिक पक्षों को एक साथ प्रस्तुत करते हुए इस ऐतिहासिक आयोजन की स्मृतियों को संरक्षित करने का सराहनीय कार्य किया है।”

 

इस अवसर पर लेखक डॉ. गोविंद कुमार सक्सेना ने कहा, “महाकुंभ भारत की सनातन आस्था और विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक है। इस पुस्तक को लिखने का मेरा मुख्य उद्देश्य यही था कि आने वाली पीढ़ियां इस दिव्य आयोजन के बारे में सिर्फ़ सुनें नहीं, बल्कि उस आंखों देखे चमत्कार को महसूस भी कर सकें। किताब लिखते समय अनेक श्रद्धालुओं की कहानिया सुनीं, उनकी आस्था की शक्ति को अनुभव किया। यह पुस्तक उसी यात्रा का जीवंत दस्तावेज है, जो बताती है कि जब आस्था जागती है तो करोड़ों लोग एक परिवार बन जाते हैं।”

 

समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न क्षेत्रों के गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।

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