
काशी के कवि सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध की सोच अद्भुत महान थी, रहते थे धरा पर लेकिन उनकी लेखनी आसमान थी-रतनलाल श्रीवास्तव*

*GRNews Network & Brodcast centre editor in chief ved Parkash Srivastava
चंदौली पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर मुगलसराय के देवांशी अस्पताल में काशी के कवि सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध के याद में शोक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन प्रख्यात समाजसेवी रतनलाल श्रीवास्तव के अध्यक्षता में अस्मिता नाट्य संस्थान के संस्थापक महासचिव नाट्य रंग कर्मी विजय कुमार गुप्ता के प्रमुख संयोजन में कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक के संचालन में काशी हिंदी विद्यापीठ के कुलाधिपति कवि सुखमंगल सिंह मंगल ,संजय सिंह शक्ति ,कवि चिंतित बनारसी ,फैयाज अंसारी ,समीर अंसारी ,शोएब खान, जमाल सिद्दीकी, भागवत नारायण चौरसिया, मंजरी शाह दान कुमारी सिंह, राकेश अग्रवाल सहित अनेको लोगों ने कवि सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध को पुष्पांजलि अर्पित कर काव्यांजलि भी अर्पित किया।
वक्ताओं ने कहा कि सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध सरल हृदय मृदुभाषी थे। वैश्विक सोच से अलग हटकर हिंदी साहित्य के उत्थान के लिए सदैव समर्पित रहे। संचालक -कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक ने कहा कि -भीगी पलकें लुप्त हो चुकी अब उनकी आवाज ,अपने धुन के माहिर थे सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध जी अब नहीं हैं,हम सब के बीच में आज,
कवि सुखमंगल सिंह मंगल ने कहा कि नव नगद ना तेरह उधार चाहिए, आपका हमें तो बस प्यार चाहिए ऐसे वैसे चलोगे तो डूब जाओगे मंजिल पाने को संस्कार चाहिए ,इस तरह के रचनाओं के रचयिता का दिवंगत होना अत्यंत दुखद है ,कवि चिंतित बनारसी ने कहा कि -ना इधर जाइए ना उधर जाइए ,वक्त की है नजाकत सुधर जाइए, इस तरह से समाज सुधारक रचनाओं के माहिर थे सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध, कार्यक्रम संयोजक विजय कुमार गुप्ता ने कहा कि सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध पूर्वांचल के विभिन्न क्षेत्रों में अपने सुमधुर गीत गजल के माध्यम से जहां भी जाते थे अपनी अलग छाप छोड़ते थे । ऐसे श्रेष्ठ व्यक्ति का निधन होना दुखद है।
अध्यक्ष जी ने अपनेउद्बोधन में कहा कि सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध साहित्यिक ,सामाजिक दर्पण के रूप में वृद्धावस्था में भी नौजवानों से कम नहीं थे । ऐसे व्यक्तित्व के लोगों से प्रेरणा लेकर हम सबको अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए । उनकी स्मृतियों को सदैव जागृत करना चाहिए।








