
आजाद अधिकार सेवा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की प्राण रक्षा हेतु राष्ट्रपति को प्रेषित किया ज्ञापन*

GRNews network & Brodcast centre* editor in chief Ved prakash Srivastava
वाराणसी16जनवरी2026 आजाद अधिकार सेवा के पदाधिकारी ने महामहिम राष्ट्रपति को भेजें पत्र में आजाद अधिकार सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर के जेल के अंदर प्राण की रक्षा किए जाने की मांग संबंधित ज्ञापन प्रेषित किया है सेवा के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने महामहिम राष्ट्रपति को प्रेषितपत्र में कहा है कि
हम, आज़ाद अधिकार सेना के पदाधिकारीगण, अत्यंत पीड़ा एवं गंभीर चिंता के साथ यह ज्ञापन आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।
दिनांक 16 जनवरी 2026 को सिविल कोर्ट, देवरिया के अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी द्वारा अपने मुवक्किल, पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमिताभ ठाकुर, से देवरिया जिला कारागार में भेंट की गई। इस भेंट के दौरान श्री अमिताभ ठाकुर अत्यंत भयभीत, व्यथित एवं मानसिक रूप से आहत अवस्था में पाए गए। उन्होंने अवगत कराया कि उनके कक्ष के ठीक बाहर जेल परिसर में एक कंप्यूटर से टाइप किया गया धमकी भरा पत्र मिला है, जिसमें अश्लील एवं स्पष्ट शब्दों में जान से मारने की धमकी दी गई है।
उक्त धमकी पत्र के साथ एक पत्थर भी रखा हुआ पाया गया, जो हिंसा एवं हत्या की स्पष्ट मंशा को दर्शाता है। यह तथ्य अत्यंत चिंताजनक है कि यह घटना उच्च सुरक्षा वाले जेल परिसर के भीतर घटित हुई है, जिससे कारागार प्रशासन की भूमिका एवं बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
श्री अमिताभ ठाकुर ने इस घटना की तत्काल सूचना जेल अधीक्षक, देवरिया को दे दी है। धमकी मिलने के उपरांत वे जेल में अपनी जान को गंभीर खतरे में महसूस कर रहे हैं तथा स्वयं को पूर्णतः असुरक्षित मान रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि न्यायिक हिरासत में रहते हुए भी उनके जीवन एवं व्यक्तिगत सुरक्षा की प्रभावी गारंटी सुनिश्चित नहीं की जा पा रही है।
महामहिम, यह प्रकरण भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार), मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993, तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का गंभीर एवं प्रत्यक्ष उल्लंघन है। न्यायिक हिरासत में रखे गए प्रत्येक व्यक्ति के प्राणों की रक्षा करना राज्य का अनिवार्य संवैधानिक दायित्व है। जेल के भीतर इस प्रकार की हत्या की धमकी प्रशासनिक लापरवाही अथवा किसी संगठित आपराधिक साजिश की ओर संकेत करती है।
आजाद अधिकार सेवा के पदाधिकारी सदस्यों ने महामहिम से सामूहिक रूप से विनम्र प्रार्थना किया हैं कि महामहिम इस अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील विषय में अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए संबंधित शासन-प्रशासन को निम्नलिखित हेतु निर्देशित करने की कृपा करें:
1. श्री अमिताभ ठाकुर जी की जान की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तत्काल प्रभाव से विशेष, प्रभावी एवं विश्वसनीय सुरक्षा व्यवस्था आजीवन सुनिश्चित की जाए।
2. धमकी पत्र एवं पत्थर की घटना की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, जिसमें कारागार प्रशासन की भूमिका की भी समीक्षा हो।
3. दोषी एवं संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
4. आवश्यकता होने पर श्री अमिताभ ठाकुर को किसी अन्य अधिक सुरक्षित कारागार में तत्काल स्थानांतरित किया जाए।
5. राज्य सरकार एवं कारागार प्रशासन से विस्तृत व जवाबदेह रिपोर्ट तलब की जाए।
आगे आजाद अधिकार सेवा के पदाधिकारी सदस्यों ने महामहिम, विनम्र निवेदन करते कहां है कि यह केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा का प्रश्न नहीं है, बल्कि न्यायिक हिरासत में बंद प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के अधिकार, लोकतंत्र, संविधान एवं मानवाधिकारों की रक्षा का विषय है। किसी भी प्रकार की देरी अपूरणीय क्षति का कारण बन सकती है।
सेनाके पदाधिकारियों ने महामहिम से उम्मीद की है कि इस विषय में शीघ्र संज्ञान लेकर आवश्यक एवं प्रभावी हस्तक्षेप प्रदान करेंगी








