
नोनहरा कांड: आक्रोशित कार्यकर्ताओं के भीड़ में भाजपा जिलाध्यक्ष ने अपने बयान पर अडिग रहकर सियासत में पेश किया मिसाल

GRNews Network editor in chief ved Parkash Srivastava
गाजीपुर। वर्तमान समय के राजनीति में नेता जिस तरह से परिस्थितियां देखकर अपने ही बयान को कई तरह से बदल देते हैं या अपने फंसते हुए देखकर सारा ठिकरा मीडिया पर फोड़ देते हैं। लेकिन नोनहरा थाना कांड में भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय ने अपने बयान को किसी भी परिस्थिति में कायम रखकर राजनीति में एक मिसाल पेश की है कि स्थितियां परिस्थितियां कुछ भी हो नेता को अपने बयान पर कायम रहना चाहिए। नोनहरा कांड में घटना के पहले दिन कुछ पत्रकारों के पूछने पर भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय ने कहा कि यह धरना प्रदर्शन भारतीय जनता पार्टी का नही था इसके बाद जिलाध्यक्ष के बयान की बड़ी चर्चा रही। समाचार पत्रों में यह बयान प्रकाशित होने के बाद कार्यकर्ताओं में बड़ा आक्रोश रहा। नोनहरा के रुकूंदीपुर निवासी सियाराम उपाध्याय की मौत के बाद जब जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय उनके घर पहुंचे तो उन्हे कार्यकर्ताओं के आक्रोश का सामना करना पड़ा। उनके सामने ही मुर्दाबाद के नारे लगे सब कुछ हो जाने के बाद भी घटना के संदर्भ में भारी आक्रोशित भीड़ के बीच उन्होने मीडिया को बताया कि हम उस बयान पर अभी भी कायम है कि यह धरना प्रदर्शन भारतीय जनता पार्टी का नही था। यह केवल बिजली के पोल की समस्या को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया था। धरना देने वाले सियाराम उपाध्याय भाजपा के कार्यकर्ता थे और छात्र नेता विकास राय भी भाजपा के समर्थक और पूर्व प्रधान हैं। हमने विकास राय से कहा था कि थाने पर धरना मत दीजिये, दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामले को खत्म कराइये। अगर न सुलझे तो गाजीपुर आइये और अधिकारियों से मिलकर मैं सारी समस्या दूर करा दूंगा। आक्रोशित भीड़ के बीच भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय ने अपने बयान पर कायम रहकर राजनीति में अपनी एक मिसाल प्रस्तुत किया है। जिसकी चर्चा सियासी गलियारों में जोरों पर है।















