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*महान समाज सुधारक शिक्षाविद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी सहजानंद सरस्वती की 75वीं पुण्य तिथि 26जून को मनाई जाएगी**

GRNews Network Brodcast center editor in chief Ved Prakash Srivastava
गाज़ीपुर।स्वामी सहजानंद सरस्वती जी एक महान समाज सुधारक, शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी एवं संगठित किसान आंदोलन के जनक एवं संस्थापक अध्यक्ष थे। तत्कालीन राष्ट्रीय राजनीति में भी उनका राजनीतिक प्रभाव अखिल भारतीय शीर्ष राजनेताओं में अग्रणी है। उनको नेताजी सुभाष चंद्र बोस बहुत आदर करते थे।
उनका जन्म 1889 में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के देवा ग्राम में भूमिहार ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा गाजीपुर और वाराणसी में पूरी की और बाद में काशी में ही संन्यास लेने के पश्चात उन्होंने वेद, पुराण और आर्ष ग्रंथों के साथ ही वेदांत मीमांसा और दर्शन का गहन अध्ययन किया।
स्वामी सहजानंद सरस्वती जी ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्य किए:
1. *किसान आंदोलन:* उन्होंने अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना की और किसानों और खेतिहर मजदूरों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी।
2. *समाज सुधार:* उन्होंने समाज में व्याप्त अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में एकता समता और बंधुत्व बढ़ाने के लिए सतत प्रयत्न किया और अपने समाज की बुराइयों को सुधारने के लिए काम किया।
3. *शिक्षा:* उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और लोगों को भारतीय संस्कृति,संस्कृत और सनातन की गुरूता के लिए संस्कृत पाठशालाएं एवं गुरुकुल की स्थापना की और इसके लिए लोगो को प्रेरित किया।
4. *स्वतंत्रता संग्राम:* उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी और ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाई।
5 साहित्य सृजन.. स्वामीजी ने अगड़ित किताबें भी लिखी हैं। जो किसान स्वाभिमान और उनके आंदोलन के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ है। ब्रह्मर्षि वंश विस्तार, किसान आंदोलन, झूठा भय मिथ्या अभिमान आदि अनेक प्रमुख रचनाएं हैं जो लोगों को आज भी पथ प्रदर्शक के रूप में काम करती हैं।
स्वामी सहजानंद सरस्वती जी का निधन 1950 में हुआ था। उनकी पुण्यतिथि 26 जून को मनाई जाती है। उनके जीवन और कार्यों से हमें प्रेरणा मिलती है और हमें उनके आदर्शों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
आइए इस 26 जून को भारत माता के इस महान सपूत को स्वामी सहजानंद सरस्वती महाविद्यालय गाजीपुर के सभागार में एकत्रित होकर इन्हें अपनी श्रद्धांजलि ,पुष्पांजलि एवं शब्दांजलि अर्पित कर इन्हें अपने समाज के लिए किए गए महान कार्यों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करें।

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