
*कर्मफल और चक्र*— *डॉ कंचन जैन

G R News
एडिटर इन चीफ वेद प्रकाश श्रीवास्तव
हम सभी ने फलों को देखा भी है, और खाया भी हैं।
लेकिन फिर भी फल से डरते हैं, कहने का तात्पर्य है कि
व्यक्तिगत अनुभव– आपने जितने भी फल देखे होंगे अधिकतर सभी गोल होंगे।
जैसे कि हमारी पृथ्वी गोल है। और उसका चक्र गोल है। पृथ्वी पर जो भी चीजें अस्तित्व में हैं और प्राकृतिक हैं।
वह सभी गोल हैं।
कहने का तात्पर्य यह है, हमारे द्वारा किए गए अच्छे व बुरे कार्य जिन्हें अध्यात्मिक भाषा में कर्म कहा जाता है।
उनका चक्र भी गोल है ।आप एक प्रयोग करके देख सकते हैं या कुछ पुरानी घटनाओं को याद करकर इस प्रयोग को जान सकते हैं। यह बात उन मनीषियों के लिए है। जो कर्मों पर विश्वास नहीं करते या जो होगा सो देखा जाएगा, पर विश्वास करते हैं।
आप एक कार्य अपनी मनोस्थिति के अनुसार, अच्छा या बुरा कर सकते हैं। उसके बाद होने वाली घटनाओं पर ध्यान दे। कि उस घटना के बाद की घटनाएं , आप को लाभ पहुंचा रही हैं, या हानि आपकी मनोस्थिति से मतलब यहां आपके सकारात्मक या नकारात्मक आचरण से है।
एक उदाहरण के माध्यम से मेरा मानना है। कि आप कर्मों के चक्र को लेकर अगर किसी फेर में है। तो आपको समझने में मदद होगी। एक व्यक्ति एक सड़क किनारे खड़ा था। और यूं ही इधर उधर देख रहा था। अचानक उसकी निगाह एक पेड़ पर गई जिस पर एक पका हुआ फल लटका हुआ था । क्योंकि आंखें फल तक जा नहीं सकती थी। तो पैरों से चलकर गया। और पैर उसे तोड़ नहीं सकते थे। इसलिए हाथों ने उसे तोड़ा। अब हाथ उसे खा नहीं सकते थे। तो मुंह ने उसे खाया। मुंह उसे अपने अंदर रख नहीं सकता था। इसलिए गया पेट में ।
इतने में उस खेत का रखवाला वहां आ गया और उसने उसे देख लिया। और वह डंडा लेकर दौड़कर आया और जोर से उसकी कमर में एक डंडा मारा।
आंसू आए आंख से।
कर्म चाहे जिसके द्वारा किए जाएं या किसी भी माध्यम से किए जाएं। कार्य के अनुरूप उसका परिणाम मिलना अटल सत्य है।
मेरा मानना है अब आप शायद समझ गए होंगे कि कर्मों के चक्र से कोई नहीं बच सकता ।अगर आपके अच्छे कर्मों के फल में वह अदृश्य शक्ति किसी फरिश्ते को आपकी मदद के लिए भेज सकती हैं।
तो आपके बुरे कर्मों के फल में वह आपको उन कर्मों की सजा देने के लिए भी किसी को भेज सकती हैं। आप जो भी करें बस यह सोचकर करें।
कि आपके द्वारा किसी को मानसिक व शारीरिक,भावनात्मक या अन्य किसी प्रकार से आकारण कष्ट ना हो ।






