
*पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आक्रोशित स्ट्रीट वेंडरों ने दिया धरना।*

GR news network एडिटर इन चीफ वेद प्रकाश श्रीवास्तव
वाराणसी। दिनांक 14 अक्टूबर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय अस्पताल के गेट के पास लगने वाले ठेला गुमटी को हटाए जाने से स्ट्रीट वेंडरों ने सोमवार को गुमटी व्यवसायी समिति के अध्यक्ष और टाउन वेडिंग कमेटी के पूर्व सदस्य चिंतामणि सेठ की अध्यक्षता में धरना दिया। इन स्ट्रीट वेंडरों का प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता मैग्सेसे पुरस्कार विजेता डॉ संदीप पांडेय ने समर्थन दिया। स्ट्रीट वेंडरों ने पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया।
धरना स्थल पर समर्थन देने पहुंचे प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता डॉ संदीप पांडेय ने कहा कि इन स्ट्रीट वेंडरों का लगातार उत्पीड़न हो रहा है। जबकि पथ विक्रेता अधिनियम 2014 इनको अधिकार मुहैया करवाता है। प्रमुख सचिव यूपी और सचिव भारत सरकार द्वारा स्ट्रीट वेंडरों के उत्पीड़न न करने के स्पष्ट निर्देश के बाद भी पुलिस इन वेंडरों का उत्पीड़न कर रही है।
उन्होंने कहा कि 2014 से ही झूठे वादे में फंसा बनारस अपने ही जनप्रतिनिधि के वीआईपी होने का भुगतान कर रहा है। धरने पर बैठे ये लोग अपनी आजीविका को अपने बलबूते पर चला रहे है। सरकार तो इनको नौकरी दे नहीं सकती और न ही इनके व्यवसाय के लिए स्थान, मगर उजाड़ने का काम तेजी से चला रही है। सरकार की यह कोशिश भी कही न कही उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखी जानी चाहिए और लघु व्यापार को समेटने की कोशिश के रूप में भी देखी जा सकेगी, यदि इनका व्यवसाय रुकेगा तभी तो लो ई पेपर रेंट और शोरूम को लाभ पहुंचाने के लिए इन छोटे वेंडरों की आजीविका छीन जाने के बाद इनका भविष्य क्या होगा, इनके बच्चो का भविष्य क्या होगा इस मामले में सरकार का क्या पक्ष है हम ये सवाल चाहते है?







