
*अघोर सेवा मंडल के संस्थापक पूज्यअवधूत बाबा सिंह शावक राम जी का प्रकट दिवस धूमधाम से मना *प्राथमिक शिक्षा ही बच्चों की नींव होती है__डॉ मधु सिंह**बच्चों की प्रथम शिक्षक मां होती है___श्रीमती संगीता सिंह*

*GR news Brodcost* editor in chief ved Prakash shrivtastav
दिलदारनगर (गाजीपुर) : अघोर सेवा मंडल गिरनार आश्रम के संस्थापक अवधूत सिंह शावक राम बाबा का 101 वां प्राकट्य दिवस बुधवार को धूमधाम से मनाया गया।सांस्कृतिक कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक नृत्य व गीत प्रस्तुत किया। प्राथमिक विद्यालय हरपुर की सहायक अध्यापिका प्रतिभा को संस्था द्वारा जनपद में शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए के लिए मुख्य अतिथि ने स्मृति चिह्न व अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया।संस्था की ओर से अतिथियों को स्मृति चिंह व अंग वस्त्रम देकर सम्मानित किया गया।विधायक ओमप्रकाश सिंह ने आश्रम में सीसी कार्य का उद्घाटन किया।समूह गायन व नृत्य में स्व राम चौधरी आदर्श इंटर कालेज प्रथम तो अब्दुल कलाम विद्यालय द्वितीय व आदर्श सरस्वती विद्या मंदिर तृतीय स्थान मिला।एकल गायन में जमानियां सन शाइन पब्लिक स्कूल के छात्र प्रियांशु गुप्ता प्रथम व आदर्श जूनियर हाईस्कूल तियरी की छात्र रागिनी द्वितीय व आदर्श सरस्वती विद्या मंदिर की छात्र पूजा तृतीय स्थान पर रही।
इस मौके पर प्राथमिक शिक्षा की दशा एवं दिशा’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ मधु सिंह विभागाध्यक्ष हिंदी स्वायतशासी यूपी कालेज वाराणसी ने कहा कि संत महात्मा का अवतरण पृथ्वी पर सामाजिक परिवर्तन के लिए होता है।बाबा शावक राम महान संत थे।
प्राथमिक शिक्षा की दशा एवं दिशा विचारणीय है।प्राथमिक शिक्षा ही बच्चों की नींव होती है।क्योंकि वर्तमान समय में बच्चें संस्कार विहीन होते जा रहे है।आश्रमों में ही केवल संस्कार सिखाया जा रहा है।क्योंकि शिक्षा का बड़ा उद्देश्य संस्कारवान बनाना है।समाज प्रदूषित हो गया नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है।समाज में बेटियों को महत्व मिलना चाहिए।बेटी मातृ शक्ति है।शक्ति का सम्मान हर समाज को करना चाहिए।इसलिए बाबा के विचारों को जीवन में उतारना ही प्राकट्य दिवस पर उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।अध्यक्षता कर रही संगीता सिंह ने कहा कि बच्चों की प्रथम शिक्षक मां होती है।इस मोबाइल युग में बच्चें अपने संस्कारो को भूलते जा रहे हैं।इसके लिए माता पिता भी कम जिम्मेदार नहीं है।इसलिए उन्हें संस्करवान बनाना जरूरी है।बाबा ने जो शिक्षा दिया है उसे अपने जीवन में उतारे और बाहरी दुनिया से निकले।साधु ओम रामजी ने कहा कि हमेशा से मातृ शक्ति पूजनीय रही है।अघोर परंपरा में महिलाओं का हमेशा सम्मान होता है।संस्कार गुरुजनों ,संत व महात्माओं से मिलेगा।आज का समाज संस्कार विहीन होता जा रहा है।इसमें सुधार की जरूरत है।दूर दराज क्षेत्र से पहुंचे भक्तों ने पूजन अर्चन कर प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर संस्था के उपाध्यक्ष रणजीत सिंह,सचिव अरविंद सिंह,विजेंद्र सिंह,गुड़िया सिंह,सत्या सिंह,रूबी सिंह,डॉ शकुंतला सिंह,शोभा जायसवाल,रिशु यादव,अजय यादव,वेद प्रकाश श्रीवास्तव,सुरेश कश्यप आदि लोग रहे।












