
# *गाजीपुर में अवैध अस्पतालों का बढ़ता जाल! महराजगंज के बिन्दपुरवा में बिना नाम-पंजीकरण के चल रहे अस्पताल पर उठे सवाल* **सीएमओ कार्यालय से महज 5 से 10 किलोमीटर की दूरी पर संचालन का आरोप, आखिर स्वास्थ्य विभाग कब करेगा जांच और कार्रवाई?

*GRNews Network youtube News Chainal*editor in chief ved Parkash Srivastava
**गाजीपुर।** जनपद में कथित अवैध अस्पतालों के संचालन का मामला लगातार चर्चा में है। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए एक नया मामला महराजगंज क्षेत्र के बिन्दपुरवा से सामने आया है। आरोप है कि यहां बिना अस्पताल का नाम प्रदर्शित किए और बिना पंजीकरण के एक अस्पताल धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, उक्त अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। यहां मरीजों को भर्ती कर इलाज किए जाने की बात भी सामने आई है। अस्पताल परिसर में कई तख्त रखे होने की जानकारी मिली है, जिन पर मरीजों का उपचार किया जाता है। लोगों का आरोप है कि मरीजों से इलाज के नाम पर मनमाने तरीके से धनराशि भी वसूली जाती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अस्पताल बिना वैध पंजीकरण और आवश्यक चिकित्सकीय मानकों के संचालित हो रहा है, तो अब तक स्वास्थ्य विभाग की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी? बताया जा रहा है कि यह स्थान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से महज पांच से दस किलोमीटर के दायरे में है। ऐसे में विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
**गरीब मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का खतरा**
स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर यदि बिना आवश्यक योग्यता और मान्यता के इलाज किया जा रहा है, तो यह मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग बेहतर इलाज की उम्मीद में ऐसे केंद्रों तक पहुंचते हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी उठाना पड़ सकता है।
अब सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है? क्या सीएमओ की टीम मौके पर पहुंचकर अस्पताल के पंजीकरण, संचालक की योग्यता, तैनात कर्मचारियों और उपचार संबंधी सुविधाओं की जांच करेगी? यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कब होगी?
**जनहित में मांग है कि स्वास्थ्य विभाग तत्काल मौके पर जांच कराए और जांच में अनियमितता मिलने पर अस्पताल का संचालन बंद कराने सहित नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों की जिंदगी और गरीबों की गाढ़ी कमाई दोनों सुरक्षित रह सकें।**







