
बिना ठोस साक्ष्य वरासत रिपोर्ट लगाने का आरोप, लेखपाल समेत जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल* **वरासत को लेकर जखनियां तहसील फिर विवादों में

GRNews Network & YouTube news chainal editor in chief Ved prakash Srivastava
गाजीपुर।मनिहारी। जखनियां तहसील एक बार फिर वरासत के मामले को लेकर सवालों के घेरे में है। तहसील क्षेत्र के एक गांव में आरोप है कि एक महिला की मृत्यु के बाद उसका एक बटा तीन हिस्सेदारी की वरासत में हल्का लेखपाल उपेंद्र राजभर ने बिना पर्याप्त ठोस दस्तावेजी साक्ष्य के रिपोर्ट लगा दी। आरोप है कि रिपोर्ट लगाने से पहले मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार संबंधी दस्तावेज अथवा किसी गवाह के बयान को आधार नहीं बनाया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मृतक की मृत्यु और उत्तराधिकारियों की स्थिति का सत्यापन आखिर किस आधार पर किया गया? मामला सिर्फ लेखपाल की रिपोर्ट तक सीमित नहीं है। सवाल संबंधित राजस्व निरीक्षक और तहसील स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी है कि रिपोर्ट का परीक्षण किस आधार पर किया गया और क्या अभिलेखों की विधिवत जांच की गई? वरासत राजस्व अभिलेखों से जुड़ा संवेदनशील मामला है। ऐसे में बिना पर्याप्त सत्यापन के रिपोर्ट लगाए जाने का आरोप सही है तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का विषय है। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर लेखपाल से लेकर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है। अब बड़ा सवाल यही है—क्या जखनियां तहसील में वरासत के लिए नियम और दस्तावेज जरूरी हैं, या महज रिपोर्ट के आधार पर ही राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज किए जा रहे हैं?








