
किसी भी दल के लिए पूर्वांचल बेल्ट राजनीतिक सामाजिक वैचारिक दृष्टिकोण से बेहद निर्णायक। __ डॉ राजेश शर्मा*

GRNews Network & YouTube news chainal editor in chief Ved prakash Srivastava गाज़ीपुर उत्तर_प्रदेश की राजनीति में #पूर्वांचल का यह बेल्ट (गाज़ीपुर,बलिया,वाराणसी,भदोही और जौनपुर) राजनीतिक,सामाजिक और वैचारिक दृष्टि से बेहद निर्णायक माना जाता है। किसी भी दल के लिए राज्य की सत्ता की राह इसी क्षेत्र से होकर गुजरती है,क्योंकि यहाँ का जनाधार और क्षेत्रीय समीकरण पूरे प्रदेश के राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
इस क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के सांगठनिक विस्तार और मजबूती के लिए निम्नलिखित रणनीतिक कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं : –
#ऐतिहासिक_और_वैचारिक_जड़ों_का_पुनरुद्धार: गाज़ीपुर,बलिया और जौनपुर जैसे जिले स्वतंत्रता संग्राम,समाजवादी और वामपंथी चेतना के साथ-साथ कांग्रेस के पुराने वैचारिक गढ़ रहे हैं। इन क्षेत्रों में पार्टी की ऐतिहासिक प्राथमिकताओं और स्थानीय जन-नायकों के योगदान को नए सिरे से जनता के बीच रेखांकित करने की आवश्यकता है।
#बूथ_स्तर_पर_सांगठनिक_सुदृढ़ीकरण: केवल केंद्रीय या प्रादेशिक बैठकों से आगे बढ़कर, गाज़ीपुर से लेकर भदोही और वाराणसी के ग्रामीण व शहरी बूथों तक कैडर को सक्रिय करना होगा। स्थानीय स्तर पर युवाओं और जमीन से जुड़े जुझारू कार्यकर्ताओं को आगे लाकर बूथ कमेटियों को मजबूत करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
#क्षेत्रीय_और_स्थानीय_मुद्दों_पर_मुखरता: पूर्वांचल की अपनी विशिष्ट आर्थिक व सामाजिक चुनौतियाँ हैं—जैसे पलायन,कृषि आधारित उद्योगों का अभाव,बुनकर समाज (वाराणसी और भदोही क्षेत्र) की समस्याएं,बाढ़ और जल निकासी के मुद्दे तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार। इन जमीनी मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाकर जन-आंदोलन खड़ा करना जरूरी है।
सामाजिक समीकरणों और न्याय की राजनीति: गाज़ीपुर और जौनपुर की बहुपरत सामाजिक बनावट तथा बलिया की विद्रोही व प्रगतिशील राजनीतिक संस्कृति के बीच तालमेल बिठाते हुए सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाला समावेशी नेतृत्व विकसित करना होगा।
#सामूहिक_नेतृत्व_और_समन्वय: वाराणसी से लेकर बलिया और भदोही तक के वरिष्ठ नेताओं और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के बीच आपसी समन्वय को बेहतर कर एक साझा राजनीतिक नैरेटिव तैयार करना होगा,ताकि विपक्षी दलों के सामानांतर कांग्रेस एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर सके।
पूर्वांचल के इन पाँचों जिलों में सांगठनिक पुनरुत्थान और जनता के बीच निरंतर सक्रियता ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के समग्र राजनीतिक पुनरुदय की सबसे मजबूत नींव बन सकती है।








