
मुर्धन विद्वान एवं कवि डॉक्टर सुखमंगल सिंह की असीम प्रतिभा को शुभकामनाओं के माध्यम से उकेरती विद्वतजनों की लेखनी*

*GRNews Network & Brodcast center। editor in chief ved Parkash Srivastava । झारखंड ।साकेत साहित्य यात्रा में कवि सुखमंगल सिंह ने आध्यात्मिक वैज्ञानिक सामाजिक सहित अन्य उन पहलुओं पर प्रकाश डाले हैं जो सतयुग , त्रेता , द्वापर और कलियुग को भी शब्दों में समेट लिए हैं। वर्तमान समय में ऐसे साहित्य की जरूरत है।भावी पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए कवि ने कलम उठाई है। शब्दों की शक्ति लंबे समय तक उर्जावान महसूस कराती रहेगी।
मैं कवि सुखमंगल सिंह को सादर प्रणाम करते हुए हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं। देश के सपूतों को इसी तरह अपनी लेखनी से दीर्घकालीन तक जगाते रहें। अनंत मंगलकामना के साथ बहुत बहुत हार्दिक बधाई।
सधन्यवाद,
डॉ प्रवीण कुमार प्रणव
उप कुलपति :- काशी हिंदी विद्यापीठ झारखंड प्रांत,
पर्यावरणविद्,
भारतीय रेडक्रास सोसायटी बांका जिला इकाई प्रबंध कमेटी सदस्य,
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा हेडक्वार्टर वाशिंगटन डीसी एवं इसरो से प्राप्त पत्र।
पिता श्री भैरव प्रसाद सिंह
ग्राम हस्तिनापुर, प्रखंड शंभूगंज
जिला बांका ( बिहार)
9931653098
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*साकेत साहित्य यात्रा कृति पर श्रीसुरेंद्र बाजपेई की शुभकामना*
वाराणसी।यह जान कर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि ओज और प्रेम के वरिष्ठ कवि डॉ. सुखमंगल सिंह का काव्य-संग्रह ‘साकेत साहित्य-यात्रा’ प्रकाशित हो रहा है। देख, समाज, धर्म, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के जागरण में अपनी कविताओं के माध्यम से कवि सदैव तत्पर दिखाई देता है। वागर होने के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर भी हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में अपना अवदान प्रस्तुत करने को कवि मन आतुर है। सजग है और सक्रिय भी।
अतः काशी के कवि समाज में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले स्नेही कवि सुखमंगल जी की साहित्य-यात्रा अवरुद्ध अनन्त और अक्षुण्ण हो, हार्दिक शुभकामनाएँ हैं।
सुरेंद्र वाजपेयी
वाराणसी
लिखने वाले सुरेंद्र वाजपेयी जी काशी के कवि समाज से हैं। वो डॉ. सुखमंगल सिंह को उनकी नई किताब के लिए बधाई दे रहे हैं और कह रहे हैं कि उनकी कविताएँ समाज, धर्म, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को जगाने का काम करती हैं।







