
*डॉ सुख मंगल सिंह कुलाधिपति ने किया कल्पवृक्ष का रोपण*

GRNews Network editor in chief ved Parkash Srivastava
हस्तिनापुर, जनपद बांका बिहार में आज दिनांक 30.9.2025 को डॉ.सुखमंगल सिंह कुलाधिपति ने कल्पवृक्ष लगाया । कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे कुलपति डॉक्टर संभाजी राजाराम बाविस्कर, संरक्षक काशी हिंदी विद्यापीठ श्री गणेश कुमार श्रीवास्तव गणेश जी, डॉ प्रवीण कुमार प्रणव आयोजन, डॉ बादल कुमार झा , उप कुलपति बिहार, नवीन कुमार निगम, नवीन कुमार रंजन सहित दर्जनों लोगो की उपस्थिति में कल्पवृक्ष रोपण किया गया। कार्यक्रम स्थल वाराणसी से 640 किलोमीटर दूर बैजनाथ धाम से 90 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।
कल्पवृक्ष एक पौराणिक वृक्ष है जो हिंदू पौराणिक कथाओं में वर्णित है। यह वृक्ष अपनी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है:
*कल्पवृक्ष की विशेषताएं*
– *इच्छाओं को पूरा करने वाला*: कल्पवृक्ष को इच्छाओं को पूरा करने वाला वृक्ष माना जाता है। यह वृक्ष जो भी इच्छा इसके सामने की जाती है, उसे पूरा करने की क्षमता रखता है।
– *देवताओं का निवास*: कल्पवृक्ष को देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। यह वृक्ष देवताओं के लिए एक पवित्र स्थान है।
– *पवित्र और शक्तिशाली*: कल्पवृक्ष को पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। यह वृक्ष अपनी पवित्रता और शक्तियों के लिए प्रसिद्ध है।
*कल्पवृक्ष का महत्व*
कल्पवृक्ष का महत्व हिंदू पौराणिक कथाओं में बहुत अधिक है। यह वृक्ष न केवल इच्छाओं को पूरा करने वाला है, बल्कि यह देवताओं का निवास स्थान भी है। कल्पवृक्ष की पूजा और उपासना करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ और शांति मिलती है।
*निष्कर्ष*
कल्पवृक्ष एक पौराणिक वृक्ष है जो अपनी विशेषताओं और महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह वृक्ष इच्छाओं को पूरा करने वाला और देवताओं का निवास स्थान है। कल्पवृक्ष की पूजा और उपासना करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ और शांति मिलती है।
इस अवसर पर बिहार झारखंड के बुद्ध जीवियों को काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी उत्तर प्रदेश द्वारा विद्या वाचस्पति/ विद्यासागर सम्मान से सम्मानित किया गया।
– सुख मंगल सिंह
कुलाधिपति
काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी








