
दुलारचंद यादव हत्याकांड में बाहुबली अनंत सिंह गिरफ्तार, 80+ समर्थक भी हिरासत में क्या हिंसा के साए में होगा ,बिहार विधानसभा चुनाव,?*

*GRNews reporter Patna*
पटना बिहार विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजते ही राज्य की राजनीति में एक और सनसनीखेज घटना ने हलचल मचा दी है। मोकामा विधानसभा क्षेत्र में 30 अक्टूबर को हुए दुलारचंद यादव हत्याकांड के मुख्य आरोपी के रूप में जेडीयू के प्रत्याशी और कुख्यात बाहुबली नेता अनंत सिंह को पटना पुलिस ने शनिवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी बाढ़ जिले के कारगिल मार्केट से की गई, जहां पुलिस की विशेष टीम ने रात के अंधेरे में कार्रवाई को अंजाम दिया। अनंत सिंह के साथ उनके दो करीबी सहयोगी—मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम—को भी घटनास्थल पर मौजूदगी के आधार पर हिरासत में लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल 81 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें अनंत सिंह के 80 से अधिक समर्थक शामिल हैं। यह कार्रवाई चुनाव आयोग के दबाव और सख्त निगरानी के बीच की गई है, जिससे विपक्ष ने सत्ताधारी एनडीए पर ‘जंगलराज की वापसी’ का गंभीर आरोप लगाया है। अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने न केवल मोकामा की चुनावी सियासत को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति में बहस छेड़ दी है—क्या यह बाहुबलियों का अंतिम दौर है या चुनावी हिंसा का नया अध्याय?
30 अक्टूबर को मोकामा के तारतर गांव में बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान दो गुटों के बीच जमकर पथराव और झड़प हुई। एक तरफ जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह का काफिला था, तो दूसरी ओर जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव (उम्र 75 वर्ष) और उनके साथी। पुलिस जांच के अनुसार, यह झड़प दो प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों—अनंत सिंह और जन सुराज के पीयूष प्रियदर्शी—के गुटों के बीच भड़की। पथराव में कई लोग घायल हो गए, और इसी दौरान दुलारचंद यादव को कठोर वस्तु से मारा गया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ हो गया कि दुलारचंद की मौत कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर से हुई, जो सिर और शरीर पर लगी गंभीर चोटों का नतीजा थी। पुलिस ने घटनास्थल से बरामद वीडियो फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अनंत सिंह को मुख्य आरोपी ठहराया। पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्तिकेय शर्मा ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “घटना के वक्त अनंत सिंह स्वयं घटनास्थल पर मौजूद थे। वीडियो सबूतों से साबित होता है कि पथराव और हिंसा उनके नेतृत्व में हुई। यह सरेंडर नहीं, बल्कि गिरफ्तारी है।”
शर्मा ने आगे कहा, “हमने 48 घंटों से लगातार जांच की। दो पक्षों के काफिले के बीच हुई यह झड़प जानलेवा साबित हुई। दुलारचंद यादव बेढना गांव के निवासी थे, और उनकी हत्या ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया।” गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने अनंत सिंह के सरेंडर की अफवाहों को खारिज करते हुए 150 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम तैनात की थी, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। अनंत सिंह को रात में गिरफ्तार करने का फैसला इसलिए लिया गया, क्योंकि दिन में उनके समर्थकों की भीड़ ज्यादा होती।
राजनीतिक उबाल: विपक्ष का हमला, सत्ता का बचाव
इस गिरफ्तारी ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है। जन सुराज पार्टी के नेता और पूर्व आईएएस प्रणव प्रियदर्शी ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ करार देते हुए अनंत सिंह पर सीधा आरोप लगाया। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और अन्य विपक्षी दलों ने एनडीए सरकार पर ‘बाहुबलियों को संरक्षण’ देने का इल्जाम लगाया। आरजेडी प्रवक्ता ने कहा, “नीतीश कुमार का बिहार फिर जंगलराज की ओर लौट रहा है। चुनाव से पहले ऐसी हिंसा स्वीकार्य नहीं।”
दूसरी ओर, जेडीयू ने अनंत सिंह की गिरफ्तारी को ‘निष्पक्ष जांच’ का हिस्सा बताया। पार्टी ने कहा कि अनंत सिंह ने खुद एक एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें पीयूष प्रियदर्शी समेत पांच लोगों को नामजद किया गया है। पटना जिला मजिस्ट्रेट त्यागराजन एसएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोर देकर कहा, “हमने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। पिछले 48 घंटों से हम कैंप कर रहे हैं। स्थिति अब नियंत्रण में है, और अतिरिक्त सुरक्षा सभी उम्मीदवारों—अनंत सिंह, वीणा देवी और प्रियदर्शी—को प्रदान की गई है।”
चुनाव आयोग ने भी त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया था, जिसके बाद बाढ़ अनुमंडल के घोसवारी और भदौर थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया। अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के डीआईजी जयंत कांत ने घटनास्थल का दौरा कर सभी पहलुओं की पड़ताल की। बिहार पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच जारी है, और और अधिक गिरफ्तारियां हो सकती हैं।







