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गाजीपुर मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स रेनू पाल नर्स ने, रक्तदान से एक एनीमिक बच्चे की जान बचाई**

**.GRNews Network editor in chief ved Prakash shrivtastav
गाज़ीपुर एनिमिक बच्चे को स्टाफ नर्स ने दिया ब्लड, गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में काम करने वाली एक नर्स ने ब्लड देकर एक मासूम की जान बचाई. दरअसल, अस्पताल में मरीजों की देखभाल करने की जिम्मेदारी स्टाफ नर्स की होती है. लेकिन गाजीपुर की एक नर्स ने इससे दो कदम आगे बढ़ते हुए प्रशंसनीय मानवीय कार्य किया है

मामला गाजीपुर के मेडिकल कॉलेज का है, जहां एक बच्चा जो जन्म के बाद से ही एनीमिक हो चुका और जन्म के बाद उसकी मां की मौत हो गई. उसका ब्लड ग्रुप उसके रिश्तेदार या अन्य लोगों से मैच नहीं कर रहा था. बच्चे का ब्लड ग्रुप अस्पताल की नर्स से मैच कर रहा था. नर्स ने खुद आगे आकर बच्चे की जान बचाने के लिए कदम उठाया.
स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले कर्मी भी कर्मचारी के साथ-साथ एक इंसान हैं और उनके अंदर भी इंसानियत होती है. ऐसा ही एक मामला गाजीपुर मेडिकल कॉलेज से सामने आया है. एक एनीमिक बच्चों को एक यूनिट ब्लड की जरूरत थी. लेकिन उस ब्लड ग्रुप का कोई भी व्यक्ति उसके रिश्तेदार या अन्य परिचित लोगों में नहीं था. बच्चे के पिता ब्लड नहीं मिलने से बेहद परेशान थे.
पिता की हालत देखकर ब्लड बैंक में काम करने वाले मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर सोनू यादव और फार्मासिस्ट बृजेश शर्मा ने उसकी परेशानी पूछी और बच्चे का ब्लड ग्रुप की जानकारी ली. दोनों लोगों ने मेडिकल कॉलेज में कार्यरत स्टाफ नर्स रेनू पाल, जिसका ब्लड ग्रुप बच्चे से मिलता था. उसे रक्तदान के लिए प्रेरित किया.
बिरनो ब्लॉक के पारा गांव के रहने वाले दयाशंकर की पत्नी निधि ने साल 2023 में एक बच्चे को जन्म दिया. जिसके 4 महीने बाद महिला की मौत हो गई. उसके बाद बच्चे का पालन पोषण पिता दयाशंकर कर रहे हैं. इसी दौरान बच्चा एनीमिक भी हो गया. जिसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया. इस दौरान बच्चों की जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने खून चढ़ाने की बात कही. लेकिन उस ग्रुप का जब कोई खून नहीं मिला तो स्टाफ नर्स ने ब्लड देने का काम किया.
एनीमिक बच्चों को रक्तदान करने के बाद स्टाफ नर्स रेनू पाल अपने को काफी खुश किस्मत माना रही है, वो काफी खुश भी दिखीं. उसके एक यूनिट ब्लड ने एक बच्चे की जान बचाने का काम किया है. साथ ही उसने बताया कि आगे अगर कभी भी ऐसे क्रिटिकल मामलों में ब्लड की जरूरत होगी तो वह आगे बढ़कर ब्लड देने का काम करेगीं. उन्होंने कहा कि जब उसे जानकारी हुई कि उस बच्चे की मां नहीं है तब उसने ब्लड देने का मनबनाया.

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