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कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक के पचपन वें जन्मदिन पर कलाकार संगम एवं सम्मान समारोह का आयोजन** *उम्र 55 का किंतु आज भी मैं अपना दिल रखता हूं बचपन का* —*कवि** *इंद्रजीत तिवारी**निर्भीक*

G R News एडिटर इन चीफ वेद प्रकाश श्रीवास्तव

गाजीपुर जिला अंतर्गत लंका, तुलसी सागर, सिद्धेश्वर नगर के जिला पत्रकार समिति हाल में मिशन जामवंत से हनुमान जी के राष्ट्रीय संयोजक सूर्य कुमार सिंह के प्रमुख संयोजन, काशी के कवि गिरीश पाण्डेय बनारसी एवं श्रीप्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश के प्रमुख संरक्षण में साहित्य चेतना समाज के संस्थापक कवि अमरनाथ तिवारी अमर मुख्य अतिथि, इंजीनियर महासंघ के जिला अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र प्रताप सिंह यादव, कवि हरिशंकर पाण्डेय, गोल्डेन गिनीज बुक अवार्ड प्राप्त युवा कवि शिवप्रकाश साहित्य विशिष्ट अतिथि त्रय के गरिमामयी उपस्थिति में महाकाव्य रचयिता कवि कामेश्वर द्विवेदी के अध्यक्षता में हास्य कवि विजय कुमार मधुरेश के संचालन में हास्य कवि डॉ. विनय पाण्डेय एवं नाट्य रंगकर्मी विजय कुमार गुप्ता, कुंजबिहारी राय, कृष्णानंद उपाध्याय के स्वागत संयोजन में पचपन विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को पर्यावरण एवं जल की शुद्धता, स्वदेशी गौवंश की रक्षा के लिए मानव जागरूकता सम्मान -2024 भेंट किया गया। उक्त आयोजन में गाजीपुर के युवा कवि डॉ. शिवप्रकाश साहित्य का पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से उपस्थित कवियों कलाकारों द्वारा दिल्ली से गाजीपुर आगमन पर गोल्डेन गिनीज बुक अवार्ड प्राप्त करने पर नागरिक अभिनन्दन किया गया। अपने पचपनवें जन्मदिन के अवसर पर कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक निर्भीक ने कहा कि उम्र पचपन का लेकिन आज भी मैं अपना दिल रखता हूं बचपन का, ज्यादातर समय पर्यावरण प्रदूषण मुक्ति के लिए जन-जागरूकता, स्वदेशी गौवंश की रक्षा, साहित्यिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों और समाज सेवा में व्यतीत करता हूं।1989 से अब तक लगभग 26 हजार से ऊपर कार्यक्रमों का संयोजन/संचालन और 25 हजार से ऊपर लोगों को मंचीय एवं आनलाईन सम्मान मैं दिलवाकर अपने आपको धन्य समझता हूं।इस तरह का पुनीत कार्य हर जन- जन को करने की जरूरत है। कवि सम्मेलन में डा. विनय बहुमुखी ने -ऊपर से चामचूम दिख रहा तड़क -भड़क लोकल एरिया में बनते ही बिगड़ी नज़र आने वाली कहीं भी दिख सकती है सड़क, कवयित्री रितू दीक्षित ने -नभ से गगन तक हर जीव – जन्तुओं से हम- सब प्यार करें, सबके भलाई के खातिर हर-पल,हर-क्षण तैयार रहें, कवि हरिशंकर पाण्डेय ने -हमरे भारत देशवा क महिमा अदभुत अपरंपार है, दानवता क शमन के खातिर वन्दन बारंबार ह, कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक ने -मानव जागरूकता कवि/ कलाकार संगम एवं सम्मान समारोह में आप सबका वन्दन है, दानवतावाद के शमन के शमन के खातिर आज मानव जागरूकता मंचीय एवं आनलाईन सम्मान के माध्यम से बारम्बार अभिनंदन है, डा.विजय नारायण तिवारी ने -हर मानव क मन में मानवतावाद क भाव जगाई बहिनी अऊरी भाई जी, पर्यावरण प्रदूषण दूर भगाई अऊरी स्वदेशी गौवंश क संवर्धन के खातिर हम सब आपन हर संभव कदम बढ़ाई भाई जी, इंजीनियर डॉ. सुरेन्द्र प्रताप सिंह यादव ने – निर्भीक सहित समस्त सुधिजनों का सुस्वागतम,हर जन-जन को खुशी दे उस पुनीत कदम को बढ़ाने के लिए हम सब बढ़ाते रहे कदम, डॉ. श्रीकांत पाण्डेय ने -जीवन को यदि हम सबको ख़ुशी से जीना है तो जल की शुद्धता और पर्यावरण प्रदूषण के रक्षा के लिए बहाना जरूरी पसीना है , कवि दिनेश शर्मा ने – श्याम सुन्दर सा प्रफुल्लित बात जो करते हैं सटीक, जन्मदिन है आज मुबारक अपने प्यारे कवि श्री इंद्रजीत निर्भीक, कवि विजय कुमार मधुरेश ने झील पर पानी बरसता है हमारे देश में,खेत पानी को तरसता है हमारे देश में, डॉ. शिवप्रकाश साहित्य ने -लगी ठोकर जो पत्थर को तो उपजी आह सी वाणी, कहा कि रास्ता बनना कभी राही नहीं बनना, युवा कवि चिदाकाश सिंह मुखर ने -मैने तो तुमको ख्वाब में सजाया है, खुद को खोकर भी तुझको पाया है, कवि भगवती प्रसाद राय ने -सबलोगन के प्रेम परस्पर के बढ़ावे के खातिर आपन नेह बढ़ावत बानी,लग जाई जा हमहन पर्यावरण प्रदूषण के दूर भगावे के खातिर हर जन- जन से अपील बढ़ावत बानी,प्रमुख संयोजक सूर्य कुमार सिंह ने – निर्भीक वो जो चल पड़े हर राह के कांटों पर,डर से जो नहीं डरे सच्चाई से चले अपने राहों पर, मुख्य अतिथि कवि अमरनाथ तिवारी अमर ने बुलाया गया मुझे देने आशिर्वाद,चख चुका था मैं उदघाटन का स्वाद, आयोजन अध्यक्ष एवं महाकाव्य रचयिता कवि कामेश्वर द्विवेदी ने -दुखी जहां जो भी मिले रंच भी ना विभेद हो प्रेम बांटते चलो मिलो न यूं की खेद हो। सुनाकर श्रोताओं को लोट पोट कर दिया। उक्त आयोजन में पीडीयू.नगर, मुगलसराय, चंदौली के फिल्म एलबम कलाकार एवं नाट्य रंगकर्मी विजय कुमार गुप्ता ने -सुन ले पाकिस्तान हम कश्मीर में तुझे किसी भी सूरत में घुसने नहीं देंगे, यदि तूं घुसने का प्रयास किया तो पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा देंगे। सुनाकर श्रोताओं को अवाक कर दिया। स्वागत संबोधन प्रोफेसर रणविजय सिंह, रघुवंश नारायण सिंह, डॉ.विनय पाण्डेय बहुमुखी, डॉ. शिवप्रकाश साहित्य धन्यवाद आभार आनलाईन कवि गिरीश पाण्डेय एवं श्रीप्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश, अरविन्द सिंह प्रधान ने किया।

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