*हाजी सरवत महमूद का इंतकाल ,खुलूश एवं मोहब्बत के एक युग का अन्त **

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गाज़ीपुर ।सेवराई तहसील की ग्राम बारा निवासी साहित्य एवं संस्कृति के पुरोधा व समाज सुधारक हाजी सरवत महमूद का देहांत हो गया गाजीपुर जनपद का प्रसिद्ध मुस्लिम बाहुल्य ग्राम स भा बारा के पुर्व प्रधान हसीना खातून वर्ष 2000 से 2005 तक के पति एवं *राष्ट्रीय बारा साहित्य मंच एवं डॉ अब्दुल हफीज इस्लामिक फाउंडेशन के संस्थापक* **हाजी सरवत महमूद खाॅं *का इन्तकाल पुरमलाल हो गया जब वह जुम्मा की नमाज के लिए गुसल करने जा रहे थेl **सरवत महमूद द्वारा लिखित पुस्तक माता-पिता अधिकार उर्दू पुस्तिका मोकामे वालेदैन हमारे धरोहर हमारे गौरव आदि काफी प्रसिद्ध पुस्तक हैं ***तीन किताबें उनकी प्रेस में छपने के लिए गई हुई है वर्ष 1983 से वर्ष 2016 तक खाड़ी देश के बहरीन में रहकर समाज के हर कामों में जो योगदान दिया है समाज उसे नही भूल सकता नही सूचना मिलने पर मोहम्मदाबाद क्षेत्र के प्रसिद्ध विद्यालय शम्स मॉडल स्कूल मे आज स्कूल के संस्थापक खान अहमद जावेद के अध्यक्षता में बाद नमाज जुमा शोक सभा का आयोजन किया गया इस अवसर पर उनके किए गए कर्म का जिक्र करते हुए कहा के ऐसे लोग बहुत कम पैदा होते हैं और हमेशा लोग उन्हें याद करते रहेंगे ईश्वर से प्रार्थना है उनके तमाम अजीज को सबरे जमील अता करें और उनके गुनाहों की मगफरत फरमाए इस अवसर पर अदनान राजा महिमा प्रजापति ललिता यादव निखत परवीन निखत नाजिम सर जावेद नाजिम राजा विनोद कुमार विशाल कुमार संजू पासवान रिंकू यादव संध्या खरवार आदि मुख्य रूप से उपस्थित हुए एक मिनट का मौन रखकर ईश्वर से प्रार्थना किया गया
अल्लाह मरहूम की मगफिरत फरमाए , उन्हे जन्नतुल फिरदौस में जगह अता फरमाए व उनके घर वालों को सब्रे जमील अता फरमाए मरहूम अपने पीछे उनकी पत्नी खातून के साथ-साथ हसीना खातून के साथ साथ चार पुत्र और दो पत्तिन्या छोड़कर गुजरे हैं उनका जन्म 8 मार्च 1952 को हुआ था उनके साहित्य प्रेमी विचार एवं उनके पास किसी ने भी अपनी अर्जी को पेश किया उसे कभी वापस जाने नहीं दिया यह सबसे बड़ी खूबी थी ।








