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*बदलते परिवेश के बीच स्वामी सहजानंद के विचारों की प्रासंगिकता *विषयक दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 29 -30 सितंबर को

गाज़ी पुर स्वामी सहजानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोऑर्डिनेटर डाक्टर प्रमोद कुमार श्रीवास्तव अनंग ने एक विज्ञप्ति में बताया कि स्वामी सहजानंद स्ना.महा.,गाजीपु(उ.प्र.)
एवं
भारतीय सामाजिक.अनुसंधान परिषद
(ICSSR),नई दिल्ली
के संयुक्त तत्त्वावधान में
द्विदिवसीय अंतर्विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (दिनांक :29-30 सितंबर, 2023) को
“बदलते सामाजिक परिवेश के
बीच कृषक समाज : स्वामी
सहजानन्द के विचारों की
प्रासंगिकता” विषयक संगोष्ठी आयोजित है
आगे डॉक्टर श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान युग में जबकि बड़ी तेजी से देश दुनिया बदल रही है, ऐसे बदलते सामाजिक परिवेश में भारतीय कृषक समाज की क्या दशा और दिशा होनी चाहिए, इस परिप्रेक्ष्य में स्वामी जी के विचारों की किसान संदर्भों में क्या प्रासंगिकता हो सकती है ; इस पर गहन मंथन, चिंतन, मनन और पड़ताल की महती आवश्यकता है, ताकि हम भारतीयता एवं राष्ट्रवाद के नवीनतम तथ्यों का उद्घाटन कर सकें। इसके लिए मुख्य विषय के साथ ही हम निम्न बिंदुओं पर भी विचार विमर्श और तर्क कराएंगे, तथा  आने वाले निष्कर्षों को सार्वजनिक भी करेंगे–1-भारत में किसान आंदोलन की परंपरा,2-भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष और किसान आंदोलन,3- किसान आंदोलन के सूत्रधार स्वामी सहजानन्द सरस्वती,4-भारतीय चिंतन परंपरा और स्वामी सहजानन्द,5-भारत के राष्ट्रवादी नेता और स्वामी सहजानन्द,6-वर्तमान स्थिति में स्वामी सहजानन्द की प्रासंगिकता,7-किसान आंदोलन में स्वामी सहजानंद की भूमिका,8- किसने और खेत मजदूर के नायक स्वामी सहजानन्द,9-स्वामी सहजानन्द का भारत,10- महात्मा गांधी और स्वामी सहजानन्द,11-स्वामी सहजानन्द और ब्रम्हर्षि वंश,12- स्वाधीनता संग्राम में सहजानन्द की भूमिका,13- सूचना तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी के युग में कृषक समाज,14-पर्यावरण संरक्षण में किसानों की भूमिका,15- भारत की आर्थिक प्रगति में किसानों की भूमिका,16- रासायनिक बनाम जैविक खेती
आवश्यक निर्देश : सारांशिका एवं शोधपत्र भेजने संबंधी-
1-सारांशिका मंगल फ़ाण्ट-12 एवं अंग्रेजी के  लिए Time New Roman-11 में टंकित कराकर वर्ड फाइल में मेल पर प्रेषित करें। 2-सहभागिताके इच्छुक प्रतिभागी अपने शोध-पत्र की सारांशिका (300शब्दोंमें) 10सितंबर, 2023 तक मेल (dr.pramodanang@gmail.com)परभेजेंगे। सारांशिका प्रेषक को ही शोध-पत्र वाचन का समय दिया जाएगा।सारांशिका के सहभागी को सारांशिका मुफ्त प्रदान की जाएगी। 3-अपना शोध-पत्र एम.एस वर्ड में मंगल फॉन्ट-12 (यूनिकोड) में टंकित कर ई-मेल करें। अंतिमतिथि20 सितंबर,2023 (परिवर्तनीय)है। 4-शोध-पत्र लिखते समय संदर्भों का स्पष्ट उल्लेख करें। पुस्तक का संदर्भ, पत्र-पत्रिका का सन्दर्भ, प्रकाशन वर्ष एवं संस्करण का अंकित होना अनिवार्य है। सन्दर्भ के लिए ए.पी.ए  शैली (APA, छठा संस्‍करण) का उपयोग करें। यह अनिवार्य है।उत्कृष्ट शोधपत्र ही स्वीकार्य होंगे। 5-शोध-पत्र पूर्ण रूप से मौलिक होना चाहिए, जिसका घोषणा-पत्र साथ में संलग्न करें। 6-शोध-पत्र के आरम्भ में शोध-सारांश (अधिकतम 200 शब्द), कुंजी शब्द (keywords) तथा अंत में, निष्कर्ष अवश्य लिखें। 7-शोध पत्र के प्रारंभ में अपना पूरा नाम तथा शोधपत्र के अंत में संस्थान का नाम- पता, मोबाइल नंबर एवं ईमेल-आईडी अंकित करें।  8–पुस्तक(ISBN)व्यय को देखते हुए न्यूनतम सहयोग के साथ प्राप्त किया जा सकेगा।
पंजीकरण शुल्क-शिक्षक =रु0 1000/-, शिक्षक (स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम) =रु0 700/-,  शोधार्थी एवं विद्यार्थी=रु0 700/-
★ प्रतिभाग पंजीकरण शुल्क RTGS/NEFT या नगद भी जमा कर सकते हैं।RTGS/NEFT,हेतुS.S.P.G.COLLEGE,GHAZIPUR(U.P.),BANK,OF,BARODA,GHAZIPUR,AC.N.-12260100002034,IFSC – BABOGHAZIP, नगद पंजीकरण शुल्क किसी भी कार्यदिवस में महाविद्यालय के हिंदी विभाग में दिन में 11:00 से,दोपहर 2:00 बजे तक जमा किया जा सकता है।
सारांशिका-शोधपत्र निम्न मेल आई डी पर प्रेषित करें- dr.pramodanang@gmail.com
समन्वयक- डॉ. प्रमोद कुमार श्रीवास्तव “अनंग”
व्हाट्सएप एवं मो0 –  9450725810

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