
*बीएचयू के इतिहास विभाग में डॉ. कुँअर नसीम रज़ा सिकरवार का व्याख्यान* **पिछले वर्ष परीक्षा में जागीरदार कुँअर नवल सिंह दीनदार ख़ाँ पर पूछे गए थे प्रश्न, *शोधार्थियों ने दिखाई संग्रहालय भ्रमण में रुचि*

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*वाराणसी / ग़ाज़ीपुर /दिलदारनगर।* काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के इतिहास विभाग में ‘एम.ए. इतिहास’ (परास्नातक) के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में *अल दीनदार शम्सी म्यूजियम एंड रिसर्च सेंटर, दिलदारनगर (गाजीपुर) के निदेशक डॉ. कुँअर नसीम रज़ा सिकरवार* उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और पूर्वजों के अभूतपूर्व योगदान से रूबरू कराया।
इस गरिमामयी अवसर पर इतिहास विभाग के वरिष्ठ आचार्य *प्रोफेसर डॉ. राजीव श्री गुरूजी एवं डॉ. मृदुला जायसवाल* मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने मुख्य वक्ता का स्वागत किया और इतिहास के व्यावहारिक अध्ययन के महत्व पर बल दिया।
*क्षेत्रीय इतिहास के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण रहा सत्र:*
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष बी.एच.यू. के एम.ए. इतिहास विभाग की परीक्षाओं में जागीरदार दीनदार ख़ाँ उर्फ़ कुँअर नवल सिंह सिकरवार और उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रश्न पूछे गए थे। इसी शैक्षणिक महत्व को देखते हुए इस विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया, ताकि विद्यार्थी इस क्षेत्रीय इतिहास को किताबों से आगे बढ़कर मूल प्रामाणिक दस्तावेजों के आलोक में समझ सकें। अपने व्याख्यान में डॉ.नसीम रज़ा सिकरवार ने मुगल सम्राट औरंगजेब के काल के भारतीय विरासत के महानायक और परगना जमानियाँ के जागीरदार कुँअर नवल सिंह सिकरवार उर्फ मुहम्मद दीनदार ख़ाँ के जीवन पर सविस्तार प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह इस राजवंश ने क्षेत्रीय सुरक्षा, न्याय और देश की साझी संस्कृति (गंगा-जमुनी तहजीब) को समृद्ध करने के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किए और कुर्बानियाँ दीं। डॉ. नसीम रज़ा सिकरवार ने बताया कि इनके पुर्वजों में लगभग बाइस पीढ़ियों की वंशावली मौजूद है। सर्व प्रथम ऊपर हिंदू राजपूत फतेहपुर सिकरी से आये हुए परगना चैनपुर, कैमूर, बिहार के सिकरवार राजा महर्षि शारिवाहन थे इनके बड़े पुत्र राजा सागर शाह उर्फ़ बबुआ जी थे जिन्होंने भभुआ नगर बसाया। इन्हीं के भाईयों एवं वंशजों में इलाके का बटवारा हुआ जिनके वंशज परगना चैनपुर, भभुआ के इर्द गिर्द कई गाँव में आबाद राजकुमारी सिकरवार चौसा व गहमर के छत्तीस गाँव में आबाद चौरासी सिकरवार, कमसार दिलदारनगर के दर्जनों गाँव में मुस्लिम सिकरवार, कमसारी पठान कहलाते हैं जो लाखों की संख्या में आबाद हैं। उपरोक्त सभी हिंदू-मुस्लिम वंशज आपसी रक्त संबंधों का, रिश्तों का निर्वहन प्रेम भाव से निभाते आ रहे हैं।
*मुगलकालीन दस्तावेजों और धरोहरों की दी जानकारी:*
निदेशक डॉ. नसीम रज़ा ने व्याख्यान के दौरान मुगल काल के असली फारसी फरमानों, ऐतिहासिक पट्टों, महत्वपूर्ण पांडुलिपियों (Manuscripts) और न्याय से जुड़े दस्तावेजों विशेषकर गोदनामा, बख्शिशनामा, किस्मतनामा, क़बालानामा, बयनामा, फैसलानामा, इक़रारनामा, महज़रनामा, परवाना राहेदारी, मदद-ए-माश, और अर्जो-चेहरा (घोड़े और घुड़सवार की पहचान पत्र) के महत्व को समझाया। उन्होंने दिलदारनगर स्थित ‘दीनदार म्यूजियम’ में संग्रहित मध्यकालीन अस्त्र-शस्त्र, प्राचीन सिक्कों और पुरातात्विक धरोहरों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं, जो इतिहास के शोधार्थियों के लिए बेहद प्रासंगिक हैं।
*शोधार्थियों ने जताई संग्रहालय भ्रमण की इच्छा:* व्याख्यान से प्रेरित होकर और पिछले वर्ष परीक्षा में आए प्रश्नों की पृष्ठभूमि को देखते हुए, इतिहास विभाग के शोधार्थियों (Research Scholars) और परास्नातक के विद्यार्थियों ने मध्यकालीन इतिहास पर गहराई से शोध करने और इन दुर्लभ दस्तावेजों का प्रत्यक्ष अध्ययन करने के लिए जल्द ही दिलदारनगर स्थित *’अल दीनदार शम्सी म्यूजियम एंड रिसर्च सेंटर’* का शैक्षणिक भ्रमण (Educational Tour) करने की इच्छा व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित प्रोफेसर्स एवं विभाग की ओर से मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त किया गया।








