
छोटे-छोटे पुरवों की गाॅंव ज़िन्दगी*। *_हिमांशुजी* *रेवती पुर में हिमांशु जी के एकल गीत काव्य संध्या का आयोजन*

*GRNews Network Brodcast center editor in chief Ved prakash Srivastava
गाज़ीपुर।हिमांशु जी के मधुर, मनोहर गीतों का रेवतीपुर में आयोजित एक अविस्मरणीय कवि-सम्मेलन वरिष्ठ पत्रकार कवि हिमांशु जी ने जब इन्होंने ‘कागज की नाव ज़िन्दगी’ सुनाया, तो सम्पूर्ण वातावरण अचानक किसी कोमल करुणा और मृदुल सौम्यता से भर उठा। गीत का प्रथम बंद ही “छोटे-छोटे पुरवों की गांव ज़िन्दगी / कितनी अपरिचित पड़ाव ज़िन्दगी / नदी में भँवर है, भँवर में फँसी / दोस्तों ये कागज की नाव ज़िन्दगी” जीवन की समूची अस्थिरता को एक पारदर्शी बिंब में बदल देता है। इसके बाद ‘साजिश भरे हमलों की घाव ज़िन्दगी’ या ‘टूटे हुए काँच पर पाँव ज़िन्दगी’ जैसे रूपकों में मनुष्य की थकान, संघर्ष और अनकहा दुःख एक शान्त व्यथा के साथ प्रकट होते हैं। उस शाम यह गीत किसी सरस कव्य-प्रस्तुति की तरह नहीं, बल्कि जीवन के गहरे सच का स्पर्श कराने वाली धीमी, आत्मीय और भीतर तक उतरती हुई अनुभूति था; और शायद यही वह क्षण था जिसने यह भरोसा जगाया कि हिमांशु उपाध्याय की काव्य-दृष्टि केवल गीत-माधुर्य तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे समय के बदलते स्वभाव को भी गहनता से छूने की क्षमता रखती है।
– डॉ.अक्षय पाण्डेय
















