
**25 हजार से ज्यादे हितग्राहियों, किसानों, किसान समूहों के साथ कार्यरत हिमाचल प्रदेश के आर्युवेद अनुसंधान संस्थान को अन्यत्र स्थानांतरित न करने की मांग**

GRNews Network & Brodcast center editor in chief Ved prakash Srivastava
गाज़ीपुर जड़ी बूटी एवं औषधि के क्षेत्र समस्त उत्तर भारत कई प्रदेशों जिलों में अपने वैचारिक शोध एवं अनुभावों के लिए जाने जाने वाले डॉ सूर्य कुमार सिंह ने आयुष मंत्रालय से मांग किया है कि आर्युवेद अनुसंधान संस्थान को हिमाचल प्रदेश जोगिंदर नगर से न हटाया जाए आप कहा कि क्षेत्रीय एवं सुगमता केंद्र उत्तर भारत-1, (RCFC(NR-1)), जोगिन्दर नगर विगत 7 वर्षों से राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय इकाई के रूप में उत्तर भारत के सभी राज्यों में औषधीय पादप क्षेत्र में परियोजना मोड में आयुष विभाग हिमाचल प्रदेश के आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, जोगिन्दर नगर कार्यरत है और आयुष मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित भवन में 11 वैज्ञानिकों एवं सहायक स्टाफ के माध्यम से डॉ अरुण चन्दन के कुशल नेतृत्व में कार्यरत है। यहाँ से हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में जड़ी बूटियों की खेती, नर्सरी, प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन, मार्केटिंग एवं समन्वय का कार्य सुचारु रूप से किया जाता रहा है। लेकिन आजकल इसे कहीं और बदलने का अचानक से निर्णय लिया गया है। मतलब हिमाचल से बाहर या आयुर्वेद विभाग से हटा कर किसी दूसरे संस्थान में ।
RCFC(NR-1) को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने से वर्षों से विकसित संस्थागत व्यवस्था, मेहनत एवं कार्य-निरंतरता प्रभावित हो जाये गी क्यूँ कि यह केंद्र समूचे उत्तर भारत में 25 हज़ार से ज्यादा हितग्राहियों (किसानों, किसान समूहों। उद्योग, जड़ी बूटी व्यापारियों) के साथ कार्य कर रहा है।
आपसे करबद्ध निवेदन है कि इस केन्द्र को आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, जोगिन्दर नगर में ही यथावत बनाए रखने/जारी रखने हेतु माननीय आयुष मंत्री भारत सरकार एवं सचिव आयुष भारत सरकार से बातचीत करके मार्गदर्शन प्रदान करें।
आयुर्वेद विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा इसके सुचारु संचाजीलन हेतु सभी आवश्यक सुविधाएँ निरंतर सुनिश्चित की जाती रही है व भविष्य में इसे और मजबूत व्यवस्था के साथ चलाया जाये जाये गा।

उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालू के साथ डॉ सूर्यकुमार सिंह जी
















