
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों ने देश को एक सूत्र में बाधा – प्रमोद वर्मा*

GRNews Network Brodcast center editor in chief Ved Prakash Srivastava
स्थानीय जखनिया। मानवता के उपासक, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक, महान शिक्षाविद, जनसंघ के संस्थापक व पथ प्रदर्शक परम श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष प्रमोद वर्मा ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि कर नमन किया और अपने आवास पर पार्टी का झंडा लगाया। इस अवसर पर प्रमोद वर्मा ने कहा देश को एक सूत्र में बांधने के लिए संविधान गढ़ा जा रहा था तो हमारे सिरमौर कश्मीर को एक खाई के जरिए संपूर्ण भारत से अलग रखा गया। इस खाई का नाम धारा 370 था। इसी खाई के सबसे बड़े विरोधी श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे। उन्होंने एक देश, एक विधान और एक प्रधान का सपना देखा था हालांकि, वे 23 जून 1953 को उनकी मौत तक अधूरा रहा, सपना भले अधूरा रह गया लेकिन उन्होंने एक विचार की ज्योत जला दी थी जिसे 66 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा किया। वर्मा ने कहा मुखर्जी का विचार एक भारत का सूत्र है। आज देश में राम मंदिर का निर्माण हुआ। कश्मीर से कनेक्टिविटी बढ़ रही है, हर मोर्चे पर वही भाव झलक रहा है जो डॉ. मुखर्जी ने बोया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की उस कल्पना को साकार कर रहा है, जिसके न सिर्फ उन्होने सपने देखे थे, बल्कि अपना जीवन भी बलिदान कर दिया था। 125वीं जन्म जयंती पर नमन है राष्ट्रपुत्र डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी… जिनके कारण ही गूंजता है गगनभेदी नारा “जहां हुए बलिदान मुखर्जी, यह कश्मीर हमारा है।” यह कहना गलत नहीं होगा कि डॉ. मुखर्जी का व्यक्तित्व और उनके विचार ने भारत को एक सूत्र में बांधा है और उसे एक सूत्रीय विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा रहा है।

















