
वह बचपन का जमाना था,थक कर आना स्कूल से,पर खेलने भी जाना था।

G R News network editor in chief Ved Prakash Srivastava
दिलदारनगर (गाजीपुर) : एक बचपन का जमाना था,जिस में खुशियों का खजाना था..चाहत चाँद को पाने की थी,पर दिल तितली का दीवाना था..खबर ना थी कुछ सुबहा की,ना शाम का ठिकाना था..थक कर आना स्कूल से,पर खेलने भी जाना था।स्कूल के समय की दोस्ती सबसे खास होती है क्योंकि यह वह समय होता है जब आप बिना स्वार्थ के एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं।साथ मिलकर कभी-कभी ऐसी शरारत कर जाते हैं जो जीवनभर याद रहती हैं। आपस में गप्पे मारना। टिफिन शेयर करना, खेलना। आंखों ही आंखों से कई बातें कह डालना। ऐसी तमाम यादों से भरा होता है स्कूली जीवन जो स्कूल की पढ़ाई पूरी कर निकलने के बाद भी जीवन भर याद रहता है। जब कभी स्कूली जीवन की याद आती है तो चेहरे पर बरबस मुस्कान आ जाती है। मन यही कहता है- वे भी क्या दिन थे।बीते दो अप्रैल को रक्साहां गांव में बॉलीवुड के चर्चित सिंगर अली खां रूमानी के घर गेट टुगेदर पार्टी में दोस्तों ने अपनी स्कूली जीवन की यादों को सांझा किया और खूब एन्जॉय किया।यह सभी दोस्त वर्ष 2003 में क्षेत्र के अग्रणी शिक्षण संस्था क्रिसेंट कॉन्वेंट स्कूल के पूरा छात्र रहे है।
कैशर खां ने स्कूली जीवन को सांझा करते हुए कहा कि वैसे तो आमतौर पर सभी के स्कूली जीवन की यादें कुछ इसी तरह की होती हैं,कभी न भूलनेवाली।मंजुल सिन्हा ने विद्यालय में बिताया हुआ समय कभी भुलाया नहीं जा सकता।शिक्षकों का डांट, दोस्तों के साथ इंटरवल में टिफिन फिर साथ में घर अब यह समय लौट के नहीं आने वाला।बॉलीवुड के चर्चित सिंगर अली खां रूमानी ने भी अपने छात्र जीवन को भी सांझा किया।वही इस मौके परइंतजार,तौकीर,आरिफ,असगर,मौसिन,मंजुल,वसीम,वसीम रजा,सुफियान,अलाउद्दीन,अफरोज,कुतुबुद्दीन आदि दोस्त रहें।

















