
*नन्द गंज में अभी तक नहीं बन सका शहीद स्मारक*

G R News * एडिटर इनचीफ वेद प्रकाश श्रीवास्तव
गाजीपुर को वीर सपूतों की धरती के नाम से जाना जाता है. देश को आजादी दिलाने से लेकर आज तक यहां के लोग मां भारती की रक्षा कर रहे हैं. आजादी की लड़ाई में नंदगंज के योद्धाओं ने अपनी जान की बाजी लगाकर देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
गाजीपुर जनपद वीर सपूतों और वीर जवानों की धरती के नाम से जाना जाता है. शायद यही कारण है कि आजादी की लड़ाई में यहां के लोगों ने अंग्रेजों से दो-दो हाथ कर आजादी दिलाई थी. इसी आजादी की लड़ाई और शहीदों की कुर्बानियों को नंदगंज के शहीद स्मारक इंटर कॉलेज ने सहेज रखा है. कॉलेज में प्रमुख क्रांतिकारियों के अलावा अन्य शहीदों की भी शिलापट लगी हुई है. प्रमुख क्रांतिकारी भोलानाथ “सह, जाने-माने क्षेत्रीय पहलवान रामधारी “सह यादव, डोमा लोहार और हर प्रसाद सिंह के नेतृत्व में आजादी का नारा बुलंद हुआ था.
आजादी की लड़ाई के दौरान नंदगंज के वीर क्रांतिकारियों ने थाने पर कब्जा जमा लिया था, जिसके बाद पुलिस की गोलियों से 100 से अधिक वीर शहीद हो गए थे. आजादी के बाद इन शहीदों की याद में शहीद स्मारक इंटर कॉलेज की स्थापना हुई, जो आज भी शहीदों के गौरव को बनाए हुए है. यहां शहादत दिवस पर आयोजन होते हैं. वहीं शहीद स्मारक की बात करें तो नंदगंज के पारस गली में बालिका विद्यालय के बाहर यह बना हुआ है, लेकिन अब जर्जर हालत में है.
पुलिस ने दागी 175 गोलियां
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर 18 अगस्त 1942 को यहां के क्रांतिकारियों ने पहले नंदगंज थाने में तिरंगा फहराने की योजना बनाई, लेकिन तत्कालीन नंदगंज थानाध्यक्ष विजय शंकर पांडेय की दोहरी चाल चलने पर क्रांतिकारियों ने नंदगंज रेलवे स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी के 52 डिब्बे लूट लिए. इसकी सूचना पर मौके पर पहुंचे अंग्रेजों ने क्रांतिकारियो पर गोलियां चलाई सौ से अधिक शहीद हुए किन्तु आज तक शहीदो की स्मृति स्मारक नहीं बनाया जा सका















