
*त्रेता युग से लेकर कलियुग तक कई शताब्दियों का,आज भी साक्षी है हरपुर जमानिया का भगवान परशुराम मंदिर

* GRNews Network Brodcost center** editor in chief Ved Prakash Srivastava***हरपुर जमानिया* परशुराम_जयंती के दिन श्रद्धालुओं का तांता लगता है,जो हमें प्रेरणा देता है कि हमारी परंपराओं और मान्यताओं को कैसे जीवित रखा जा सकता है। यह स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म यमदग्नि ऋषि के आश्रम में हुआ था,जो हमें उनकी महानता की याद दिलाता है। इस कारण उनकी जयंती पर दूरदराज से लोग दर्शन को आते हैं, जो हमें एकता और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। महिलाएं ढोल-मजीरा व गाजे-बाजे के साथ मंगल गीत गाती हैं तो पुरुष भी हवन-पूजन कर स्मरण करते हैं,जो हमें अपनी संस्कृति की समृद्धि की याद दिलाता है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग से विनम्र आग्रह है कि भगवान परशुराम की जन्मस्थली और महर्षि यमदग्नि की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध,यह स्थान धार्मिक पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है,जो हमें अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का अवसर प्रदान करता है। #भगवान_परशुराम_के_मंदिर का सुंदरीकरण करके,हम इस स्थल की भव्यता को बढ़ा सकते हैं और पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं








