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गाज़ीपुर नवापुरा गंगा घाट पर छठ पूजा के लिए बनी वेदियो की सुरक्षा होती है लक्ष्मी गणेश से*** *

GRNews network* editor in chief ved Parkash Srivastava गाजीपुर Iगंगा घाटों पर छठ पूजा से पहले बनने वाले बेदियों को लेकर एक अजीबो-गरीब नजारा देखने को मिल रहा है. यहां के गंगा घाट पर छठ व्रती महिलाओं या फिर उनके परिवार के लोग आकर बेदी बना रहे हैं. इस दौरान वह बेदी की सुरक्षा के लिए गणेश लक्ष्मी की मूर्ति तैना कर रहे हैं. इस तरह का नजारा गाजीपुर के नवापुरा गंगा घाट पर पिछले कई सालों से देखने को मिल रहा है. लोगों की मान्यता है कि गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति उनके बेदी की सुरक्षा करती हैं.
दिवाली के बाद से ही छठ महापर्व की तैयारियां जोरों-शोरों से शुरू हो जाती हैं. चाह दिनों तक चलने वाले महापर्व नहाए खाए से शुरू जाता है. उसके पहले गंगा घाट, नदी तालाब, पोखरे या फिर ऐसी जगह जहां पर व्रती महिलाएं छठ का पूजा करेंगी, वहां पर बेदी बनाने की परंपरा रहती है. गाजीपुर जिले के विभिन्न गंगा घाटों पर बेदी बनाई जा रही है. वैसे तो बेदी लगभग सभी गंगा घाट और नदी, तालाब के किनारे बनाए जा रहे हैं. लेकिन गाजीपुर के नवापुर गंगा घाट के किनारे पिछले कई सालों से अजीबो-गरीब तरीके से बेदी का निर्माण की जा रहा है.
बेदी की सुरक्षा के होते पुख्ता इंतजाम
यहां पर व्रती महिलाएं या फिर उनके परिजन पहले गंगा घाट के किनारे से मिट्टी निकालते हैं और फिर उस मिट्टी से घाट के किनारे ही छठ पूजा से कई दिन पहले बेदी बना डालते हैं. ऐसे में इन सभी लोगों को डर होता है कि कहीं कोई उनकी बेदी को तोड़कर उस पर अपना बेदी ना बना ले या फिर उस पर अपना नाम नलिख ले. इसी के समाधान के लिए दिवाली पर गणेश और लक्ष्मी की पूजा के बाद दोनों की मूर्ति लेकर घाट किनारे आते हैं.
कैसे सुरक्षित रहेगी बेदी?
बेदी बनाने के बाद उस मूर्तियों को अपनी-अपनी बेदी पर स्थापित कर देते हैं. इन लोगों का मानना है कि लक्ष्मी और गणेश उनकी बेदी की सुरक्षा करेंगे. लोगों का विश्वास होता है कि आस्था के चलते कोई भी उनकी बेदी से मूर्ति नहीं हटाएगा और उनकी बेदी सुरक्षित रहेगी. जिससे वह छठ पूजा के दिन गंगा घाट पहुंचकर आसानी से छठ महापर्व मना सकेंगे. बेदी बनाने वाले प्रवीण उपाध्याय ने बताया कि छठ पूजा में बेदी की विशेष मान्यता होती है. सबसे पहले बेदी की पूजा कर और दीपक जलाकर महापर्व की शुरुआत की जाती है.
उन्होंने बताया कि बेदी की सुंदरता बढ़ाने और सुरक्षा के लिए गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति रखी जाती हैं.बबीता सिंह ने बताया कि इस घाट पर दूर-दूर से आकर लोग अपनी बेदी बना देते हैं. उस पर मूर्ति रख देते हैं ताकि उन्हें पहचान हो जाए कि यह उनकी बेदी है. क्योंकि उस मूर्ति की वह पूरे 12 महीना पूजा किए होते हैं तो उन्हें अपनी मूर्ति की पहचान होती है. साथ ही बेदी के पर्व से कई दिन पहले बना जाने के कारण उसकी सुरक्षा भी होती रहे. इसी को लेकर लोग अपनी बेदी पर मूर्तियों को रख देते हैं और फिर छठ पूजा वाले दिन उस मूर्ति का विसर्जन भी कर देते हैं.

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