पुलिस के एक अधिकारी का वीडियो वायरल होने के बाद ही बीएचयू में सुलगी आंदोलन की आग*

वाराणसी 7 नवंबर.lबुधवार की देर रात बीएचयू परिसर में आईआईटी की छात्रा के साथ छेड़खानी के बाद छात्रा का वीडियो बनाया गया था मनचलों द्वारा। जिससे आक्रोशित होकर छात्र व छात्राएं धरने पर बैठ गए। और मनचलों की शिनाख्त कर कार्यवाही करने के साथ ही छात्राओं की सुरक्षा व आईआईटी को अलग कर उसकी हदबंदी की मांग करने लगे। मामला बिगड़ता देख आईआईटी के शिक्षकों, स्थानीय पुलिस और जनपद के आलाधिकारी भी मौके पर पहुंच मामले को शांत करने में जुट गए। इसी दौरान पुलिस के एक अधिकारी द्वारा मामले को शांत कराने को लेकर अति आत्मविश्वास दिखाते हुए जनपद के आलाधिकारी को भरोसा दिया गया की इस धरना को खत्म करवा दिया जाएगा। और आनन फानन में बीएचयू आईआईटी के डायरेक्टर से लेकर रजिस्ट्रार तक से संपर्क कर छात्र और छात्राओं की बात मान कर किसी तरह इस धरने को खत्म करवाने के लिए तैयार किया गया। इस दौरान इस पुलिस के अधिकारी द्वारा प्रदर्शन कर रहे छात्र छात्राओं को बुला कर फोन की बात सुनाते हुए इनकी सारी बात मान लेने की बात बताई गई। जिससे खुश होकर छात्र और छात्राओं ने धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
*शर्त मानने के साथ ही इसके दूरगामी परिणाम से निश्चिंत थे पुलिस अधिकारी महोदय, इनको क्या पता की बीएचयू और आईआईटी में हदबंदी का क्या दूरगामी असर होगा मानसपुत्रो पर*
धरना प्रदर्शन समाप्त करवा कर अभी राहत की सांस भी नहीं ले पाए की महामना के मानसपुत्रों ने शुरू कर दिया धरना प्रदर्शन। बीएचयू छात्रों का कहना है कि जिस महामना की बगिया के लिए भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय जी ने लोगो से भीख मांग कर कितनी मेहनत से तैयार किया था ये प्यारी सी बगिया उसका बटवारा कतई बर्दाश्त नहीं है। अगर आईआईटी को अपना अलग कैंपस चाहिए तो वो बरकछा क्यों नही चले जाते। रही बात सुरक्षा की तो क्या बीएचयू के दो हिस्से कर देने से छात्राओं को सुरक्षा मिल जायेगी क्या? छात्रों का कहना है की 2017 में भी छात्रा के साथ छेड़खानी हुई जिसको लेकर एक बड़ा आंदोलन भी हुआ इस दौरान प्रधानमंत्री के रूट को भी बदला पड़ा था। बाद में छात्रों की माग मानते हुए महिला चीफ प्रॉक्टर रोयना सिंह की न्युक्ति की गई। महिला सुरक्षाकर्मियों को रखा गया और कर चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गया। लेकिन नतीजा सिफर रहा। बीएचयू में तैनात सुरक्षाकर्मियों व महिला सुरक्षाकर्मियों का इस्तेमाल सुरक्षा की बजाय और काम में लिया जाने लगा। जिसका नतीजा रहा की बीएचयू परिसर कभी सुरक्षित नहीं रहा। और इस तरह के घटना की पुनरावृति दुबारा हुई।
*पूर्व में भी आंदोलन के समय एक पुलिस अधिकारी द्वारा गलत निर्णय बना था बवाल का बड़ा कारण*
20017 में भी छात्रा से छेड़खानी के मामले धरना प्रदर्शन के दौरान छात्रों से बदतमीजी से बात करने से बवाल और बढ़ गया इस दौरान तत्कालीन थानेदार द्वारा जब मना किया गया तो छात्रों के सामने ही कहासुनी होने लगी इस बात की सूचना जब आलाधिकारियों को हुई तब दोनो लोगो पर कार्यवाही करते हुई उनको हटाया गया। लेकिन तब तक बवाल बढ़ चुका था।
*ऊंची पहुंच वाले इस पुलिस अधिकारी पहुंच इतनी है कि इनका तबादला गैर जनपद विगत कई माह पहले हो चुका है लेकिन अभी भी जमे पड़े है जबकि इनकी वजह से एक इंस्पेक्टर के खिलाफ छेड़खानी का मुकदमा उसी के थाने में लिखा जाता है तो वही इंस्पेक्टर लूट के एक मामले में भगोड़ा घोषित हो चुका है वही इस धरना प्रदर्शन की वजह से एक इंस्पेक्टर हो चुके लाइन हजार*
*बीएचयू का वो कौन सा अधिकारी है जो लगातार सुरक्षा से कर रहा खिलवाड़*
बीएचयू परिसर में सीसीटीवी तो हर चौराहे पर लगे है लेकिन काम नहीं करते। अगर ये काम करते तो क्या चंदन के पेड़ो की दो बार चोरी के बाद भी चोर आराम से परिसर में टहल रहे होते। 72 घंटे बीतने के बाद भी अभी इन मनचलों की शिनाख्त नहीं हो पा रही है। यहां तक कि बाइक चोरी, मोबाइल छिनैती ये तो आम बात हो चुकी है बीएचयू परिसर में। अगर सीसीटीवी कैमरे काम करते तो बीएचयू परिसर में काफी हद तक अपराध पर अंकुश लगाया जा सकता था। लेकिन लापरवाही का आलम ये की सीसीटीआई कैमरे तो लगे है लेकिन शो पीस के तौर पर। यहां तक कि बीएचयू की जमीनों पर अवैध कब्जे के मामले में अपनाया जा रहा लचर रवैया। जबकि सुरक्षाकर्मियों के नाम पर हर महीने आता है करोड़ों का फंड फिर भी सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़

















