
*दिलदारनगर गांव के करीम रज़ा का अनूठा वंशवृक्ष, इन्टरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में हुआ दर्ज*

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एडिटर इन चीफ वेद प्रकाश श्रीवास्तव
ग़ाज़ीपुर। जहाँ लोग अपने बाप-दादा से ऊपर परदादा, लकड़दादा एवं पूर्वजों के नाम भूलते जा रहे हैं वहीं आज के दौर में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने पूर्वजों, कूल, ख़ानदान, कुन्बे का इतिहास, वंशवृक्ष, वंशावली, शज़रा संरक्षित कर, तैयार करने के प्रति नई पीढ़ी में जागरुकता लाकर संदेश देने का काम कर रहे हैं। ऐसे हैं जनपद ग़ाज़ीपुर में दिलदारनगर के सेवानिवृत्त शिक्षक, 80 वर्षीय मुहम्मद करीम रज़ा ख़ाँ जिन्होंने अपने ऐतिहासिक पारिवारिक विरासत की वंशवृक्ष (फैमिल ट्री) वंशावली को संकलित, संरक्षित एवं संजोकर तथा प्रदर्शित कर नायाब एवं अनूठा कारनामा अंजाम दिया है। अगर इनके पारिवारिक वंशावली पर एक नज़र डालें तो “एक पृष्ठ-एक दृष्टि वाली वंशवृक्ष” में सम्मिलित पुरुषों की संख्या 331 तथा वंशवृक्ष में सम्मिलित संकेत के अनुसार महिलाओं की संख्या 295 दर्ज किये गए हैं जो अंको में दर्शाया गई है। इस तरह कुल महिलाओं-पुरूषों की संख्या 626 दर्ज किया है। वंशवृक्ष की विशेषता यह है कि पिछले चार सौ वर्षों में संकेत चिन्ह के माध्यम से उन व्यक्तियों को भी दर्शाया गया है जिनकी बचपन में एवं विवाह से पूर्व यानि युवाकाल में मृत्यु हो चुकी है। यह एक जबरदस्त शोध परक वंशवृक्ष तैयार किया गया है, जिसे हिन्दु-मुस्लिम एकता तथा मुस्लिमों के भारतीय होने औ








