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कैलाश मानसरोवर की मुक्ति और तिब्बत की स्वतंत्रता को लेकर मंथन।*

*GRNews Network*editor in chief Ved prakash Srivastava
वाराणसी। कैलाश मानसरोवर की मुक्ति और तिब्बत की स्वतंत्रता को लेकर मंगलवार को संत कबीर प्राकट्य स्थली लहरतारा में शिवधाम कैलाश मानसरोवर तिब्बत फ्रीडम एसोसिएशन (काशी प्रांत) के तत्वावधान में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में तिब्बत सरकार की रक्षा मंत्री डोल्मा गायरी के साथ कई गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में शामिल हुए। डोल्मा गायरी ने कहा कि शिव, महादेव, शंकर, भोलेनाथ सभी एक हैं। शिव के रूप अनेक हैं, और हम सभी उनसे जुड़े हैं। बौद्ध भी शिव को उतना ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है। चीन लद्दाख से अरुणाचल तक जमीन हड़प रहा है। वह किसकी जमीन है। यह भारत की ही तो है। चीन के मन में क्या है, यह बात नहीं है, बल्कि चीन आखिर कर क्या रहा है। चीन लैंड माफिया की तरह जमीन कब्जा करता है। वह आता है, धमकाता है और फिर थोड़ी-थोड़ी करके जमीन हड़प लेता है। 1962 में भारत की संसद में क्या प्रस्ताव पारित किया गया था कि एक-एक इंच जमीन हम चीन से वापस लेंगे। इस अवसर का मुख्य रूप  विकास प्राधिकरण मानद सदस्य अम्बरीष सिंह भोला, महंत गोविंद दास शास्त्री सहित सैकड़ो गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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