धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप एवं निर्दोष संतों पर दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष जांच की मांग

*GRNews Network Brodcast centre editor in chief Ved prakash Srivastava
गाज़ीपुर। उत्तर प्रदेश में हाल ही में घटित घटना को लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों एवं धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। संत समाज एवं उनके अनुयायियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार, अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप तथा उसके उपरांत दर्ज की गई एफआईआर को लेकर जनमानस में व्यापक चिंता व्याप्त है। वक्ताओं ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता एवं अपने धार्मिक कार्यों के संचालन का मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में इन अधिकारों के हनन की आशंका उत्पन्न हो रही है। किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को कानून सम्मत, पारदर्शी एवं निष्पक्ष होना चाहिए। शहर अध्यक्ष संदीप विश्वकर्मा ने कहा कि सरकार पूर्णतः विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मगुरु शंकराचार्य एवं उनके शिष्यों को गलत तरीके से मुकदमे में फंसाया गया है, जिसे आम जनमानस किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने सरकार से अपनी “कुंठित मानसिकता” त्यागते हुए मुकदमा तत्काल वापस लेने की मांग की। पूर्व विधायक अमिताभ अनिल दुबे ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि धर्मगुरुओं के विरुद्ध दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। वरिष्ठ नेता रविकांत राय ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए संत समाज को प्रताड़ित कर रही है, जो सनातन परंपरा के विरुद्ध एक गंभीर षड्यंत्र है।
दर्ज की गई एफआईआर की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
घटना में सम्मिलित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए।
धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
कार्यक्रम में चंद्रिका सिंह, हामिद अली, राशिद, राजेश गुप्ता, अखिलेश सिंह यादव, राम नगीना पांडे, मुसाफिर बिंद, अक्षय बिंद, राजेश सिन्हा, कुंदन खरवार, सदानंद गुप्ता, रईस अहमद, आशुतोष गुप्ता, राघवेंद्र कुमार, चंद्रभान यादव, प्रकाश राय, देवेंद्र सिंह, धर्मेंद्र कुमार, शशांक उपाध्याय, संजय कुमार गुप्ता, ओम प्रकाश यादव, लखन श्रीवास्तव, शंभू सिंह कुशवाहा, राहुल कुशवाहा, रमेश चंद्र गुप्ता, अभय कुमार, जयप्रकाश पांडे, ताहिर अब्बासी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि लोकतांत्रिक परंपराओं एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु उचित कदम उठाए जाएंगे।















