
वाराणसी रेलवे स्टेशन कैंट से आरओबी होकर पहुंचेगें यात्री रोपवे स्टेशन*।

GRNews Network & Brodcast center editor in chief Ved prakash Srivastava
वाराणसी। ट्रैफिक व्यवस्था को नई दिशा देने वाली रोपवे परियोजना अब संचालन के अंतिम चरण में है। यात्रियों की सुविधा और जाम की समस्या को कम करने के लिए कैंट रेलवे स्टेशन परिसर से रोपवे स्टेशन तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करने हेतु रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) बनाने का निर्णय लिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत ट्रेन से उतरने वाले यात्री मुख्य सड़क पर आए बिना सीधे ऊपरी मार्ग से रोपवे स्टेशन तक पहुंच सकेंगे। सर्कुलेशन एरिया में अलग-अलग पिकअप और ड्राप जोन बनाए जाएंगे, ताकि यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत न झेलनी पड़े।
रोपवे परियोजना के प्रारंभिक प्रस्ताव में आरओबी शामिल नहीं था, लेकिन हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में ट्रैफिक प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर विस्तार से चर्चा के बाद इसे जोड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार, बढ़ती भीड़ और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए परियोजना में यह संशोधन आवश्यक समझा गया। बैठक में सुरक्षा मानकों को लेकर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल से भी सुझाव लिए गए। साथ ही भीड़ प्रबंधन के वैज्ञानिक मॉडल तैयार करने के लिए देश के विभिन्न आईआईटी संस्थानों से परामर्श किया गया। इन सुझावों के आधार पर स्टेशन परिसर और रोपवे टर्मिनलों के डिजाइन में बदलाव किए गए हैं।
यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए कैंट स्टेशन, काशी विद्यापीठ स्टेशन और रथयात्रा स्टेशन के आसपास नए सर्कुलेशन एरिया विकसित किए जाएंगे। ड्रॉप-ऑफ और पिक-अप जोन अलग-अलग निर्धारित होंगे, ताकि वाहनों की आवाजाही सुव्यवस्थित रहे। पार्किंग के लिए पृथक स्थान तय किया जाएगा और अतिरिक्त लेन विकसित की जाएंगी, जिससे ऑटो, टैक्सी और निजी वाहनों का प्रवाह बाधित न हो। रोपवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह एयरपोर्ट मॉडल पर आधारित होगी। प्रवेश से पहले बैगेज एक्स-रे स्कैनर से सामान की जांच होगी, जबकि प्रत्येक यात्री को डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर से गुजरना होगा। आवश्यकता पड़ने पर हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर से द्वितीयक जांच भी की जाएगी। सभी स्टेशनों पर सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम स्थापित होगा, जिसकी निगरानी कंट्रोल रूम से लाइव की जाएगी। अलग एंट्री-एग्जिट गेट, आपातकालीन निकास मार्ग और आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम भी लगाए जाएंगे। सुरक्षा की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (एसएसएफ) को सौंपी जाएगी। क्विक रिएक्शन टीम की तैनाती भी की जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके। एसएसएफ ने एंट्री-एग्जिट प्रबंधन, कंट्रोल रूम समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र का विस्तृत खाका तैयार किया है।

















