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यह विश्वविद्यालय राष्ट्रबोध, सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान-परम्परा का जीवंत केंद्र है-बड़े दिनेश*

GRNews Network Brodcast centre editor in chief Ved prakash Srivastava
वाराणसी। विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक बड़े दिनेश के सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय आगमन के अवसर पर उनका स्वागत कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने वैदिक मंगलाचरण, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न अर्पित कर भारतीय परम्पराओं के अनुरूप किया।

प्रवास के दौरान बड़े दिनेश ने परिसर स्थित ऐतिहासिक सरस्वती भवन पुस्तकालय का विस्तृत अवलोकन कर कहा कि यहाँ संरक्षित दुर्लभ एवं बहुमूल्य पाण्डुलिपियों को भारतीय ज्ञान-परम्परा की अमूल्य धरोहर है। यह विश्वविद्यालय राष्ट्रबोध, सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान-परम्परा का जीवंत केंद्र है। यहाँ की शैक्षणिक परम्परा भारतीय संस्कृति की आत्मा को सशक्त रूप से आगे बढ़ा रही है। “वेद, दर्शन, आयुर्वेद, व्याकरण एवं काव्यशास्त्र से सम्बन्धित ये पाण्डुलिपियाँ हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। इनका संरक्षण, सूचीकरण एवं डिजिटलीकरण राष्ट्रहित का महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने पाण्डुलिपियों के वैज्ञानिक संरक्षण एवं आधुनिक तकनीक के प्रयोग की भी सराहना किया।संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ‘ज्ञान भारतम्’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से विश्वविद्यालय की दुर्लभ पाण्डुलिपियों का व्यापक डिजिटलीकरण किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि यह विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति, शास्त्रीय विद्याओं एवं आध्यात्मिक परम्पराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरन्तर समर्पित है। संस्कृत केवल भाषा नहीं, अपितु भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति है।उन्होंने आगे कहा कि बड़े दिनेश जी का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं शोधात्मक विकास के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। उनके संरक्षण से विश्वविद्यालय को नई दिशा और ऊर्जा प्राप्त होगी। उस दौरान शैक्षणिक एवं वैचारिक संवाद परिसर भ्रमण के उपरांत विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, अनुसन्धान योजनाओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में भारतीय ज्ञान-प्रणाली के एकीकरण तथा समाजोपयोगी अध्ययनों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर संस्कृत शिक्षा के आधुनिकीकरण, तकनीक एवं परम्परा के समन्वय तथा युवाओं में सांस्कृतिक चेतना के विकास पर विशेष बल दिया गया। अंत में विश्वविद्यालय परिवार की ओर से मुख्य अतिथि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस अवसर पर प्रो जितेन्द्र कुमार, प्रो राजनाथ सहितअनेक वरिष्ठ आचार्यगण, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

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