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विद्युतकर्मी द्वारा 23 अप्रैल को पूर्वांचल विद्युत निगम कार्यालय पर सत्याग्रह।

*GR news network* editor in chief Ved Prakash Srivastava
वाराणसी। दिनांक 19 अप्रैल, उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड एवं इसके सहयोगी निगमों द्वारा आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से कार्य कर रहे कर्मचारियों के साथ हो रहे शोषण, वेतन भेदभाव, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और संभावित निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने 23 अप्रैल 2025 को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, वाराणसी मुख्यालय पर सत्याग्रह किया जाएगा। उक्त जानकारी उत्तर प्रदेश कार्पोरेशन निविदा, संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पांडेय ने प्रेसवार्ता के दौरान दी।

उन्होंने ने मिडिया को बताया कि लाइनमैन व उपकेंद्र परिचालन जैसे जोखिमपूर्ण तकनीकी कार्य लेबर अनुबंध के तहत बिना आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के करवाए जा रहे हैं। इस लापरवाही का परिणाम यह है कि प्रत्येक वर्ष दर्जनों कर्मचारी दुर्घटनाग्रस्त होकर या तो जीवन खो बैठते हैं या अपंग हो जाते हैं। एक ओर सैनिक कल्याण निगम से नियुक्त संविदा उपकेंद्र परिचालकों को लगभग ₹30,000 प्रतिमाह वेतन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर निजी संविदाकारों से नियुक्त कर्मचारियों को मात्र ₹13,000 में उसी कार्य के लिए नियोजित किया गया है। यह नीति स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण व अन्यायपूर्ण है। मार्च 2023 में हुए शांतिपूर्ण आंदोलन में भाग लेने वाले सैकड़ों कर्मचारियों को बिना वेतन भुगतान के सेवा से पृथक कर दिया गया। ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद न तो उन्हें कार्य पर बहाल किया गया और न ही बकाया वेतन का भुगतान हुआ। ग्रामीण उपकेंद्रों के लिए निर्धारित 20 और शहरी उपकेंद्रों के लिए 36 कर्मचारियों की नियुक्ति आदेश होने के बावजूद, पूर्वांचल विद्युत निगम द्वारा मानक से कम स्टाफ तैनात किया गया है, इसके उलट, बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी कर कार्य का अतिरिक्त भार शेष कर्मचारियों पर डाल दिया गया है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना और भी बढ़ गई है।

उन्होंने कहा कि संघों ने विरोध जताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को 55 वर्ष की आयु होते ही बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए सेवा से पृथक किया जा रहा है। इस आयु में नया रोजगार मिलना कठिन होने से सैकड़ों परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट मंडरा रहा है। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर प्रत्येक माह वेतन से कटौती की जाती है, लेकिन न तो कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है और न ही उपचार पर खर्च की गई धनराशि की भरपाई होती है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के संभावित निजीकरण की चर्चाओं ने पिछले एक दशक से अधिक समय से सेवा दे रहे हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को गहरी अनिश्चितता और बेरोजगारी की आशंका में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन प्रबंधन ने अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की। ऐसे में 23 अप्रैल को निगम कार्यालय पर शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर आवाज बुलंद की जाएगी। संघों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा।

पत्रकार वार्ता में मुख्य रूप से देवेंद्र कुमार पांडेय, अरविंद यादव, असलम आदि लोग मौजूद थे।

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