
*नवरात्रि विशेष मिशन शक्ति 5.0 के तहत हम ऐसी नारी शक्ति की कहानी सामने ला रहे हैं जिन्होंने समाज में मिसाल कायम की

GRNews Brodcast centre ब्यूरो सैदपुर पवन मिश्रा की रिपोर्ट
*नारी शक्ति की गूंज: रोली अग्रहरि बनीं प्रेरणा की प्रतीक*
*पहले ही प्रयास में यूपी पुलिस में चयन, रोली ने रचा इतिहास*
“*जिम्मेदारी, संघर्ष और सम्मान — यही है महिला आरक्षी रोली की पहचान”*
*महिला आरक्षी रोली ने बढ़ाया परिवार का मान*
*कड़ी मेहनत और लगन से किया आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार*
सैदपुर गाज़ीपुर।उत्तर प्रदेश की महिला आरक्षी रोली अग्रहरि ने अपने बुलंद हौसले और कठिन परिश्रम से यह साबित कर दिया है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। पुलिस सेवा जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को निभाते हुए उन्होंने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को भी साकार करने की दिशा में मिसाल पेश की है।
*रोली अग्रहरि, वर्तमान में सैदपुर कोतवाली में महिला आरक्षी के पद पर तैनात हैं।*
*उनकी पोस्टिंग क्रमशः जंगीपुर, सुहवल, और फिर सैदपुर कोतवाली में हुई।*
*मार्च 2025 में मिशन शक्ति के तहत उत्कृष्ट कार्य के लिए*
*वाराणसी मंडल के आईजी मोहित गुप्ता द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित*
*गाजीपुर में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।*
रोली ने बीए प्रथम वर्ष में रहते हुए ही यूपी पुलिस में चयन की तैयारी शुरू कर दी थी और पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त की।
उनके पिता जगदीश प्रसाद एक व्यवसायी हैं, जिनका सपना रोली ने पूरा किया। पांच भाई बहन में रोली सबसे छोटी है रोली में हाई स्कूल की परीक्षा 2015में एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा 2017 में राष्ट्रीय विद्यापीठ इंटर कॉलेज फैजाबाद से उत्तीर्ण किया तो वहीं ग्रेजुएशन श्रीमती धनपता मौर्य स्मारक महाविद्यालय रसूलपुर लीलहा अयोध्या से किया इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही उत्तर प्रदेश पुलिस के परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली
नौकरी के साथ-साथ वे परिवार की जिम्मेदारियां भी बखूबी निभा रही हैं।
* *प्रेरणा बनीं रोली*
रोली की कहानी यह बताती है कि अगर मेहनत और लगन हो, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं। यूपी पुलिस जैसी प्रतिष्ठित सेवा में चयनित होकर उन्होंने हजारों युवतियों को प्रेरित किया है।
“प्रत्येक महिला में असीम संभावनाएं हैं, बस उन्हें पहचानने और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।”


















