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*45 करोड़ की लागत से बना वाराणसी का सबसे मशहूर नमो घाट धंसा ,5 घायल , प्रीति बिल्डर्स कार्यदाई संस्था के गुणवत्ता की जांच के आदेश*

GRNews Network*** editor in chief Ved Prakash Srivastava

वाराणसी के सबसे प्रसिद्ध नमो घाट पर बुधवार की शाम जमीन धंसने से हड़कंप मच गया। जिस जगह पर जमीन धंसी वहां एक दुकानें भी लगी थी। जमीन के साथ दुकान भी एक तरफ लुढ़क गई। इससे दुकानदार और hoग्राहक भाग खड़े हुए। अचानक हुए हादसे से अफरातफरी मच गई। फिलहाल वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने रस्सी की बैरिकेडिंग लगाकर लोगों का आना-जाना बंद कर दिया। हादसे की जानकारी मिलते ही कार्यदायी संस्था और नगर निगम के अधिकारी भी घटना का जायजा लेने पहुुंचे।
बताया जाता है कि जो हिस्सा धंसा है वह शाही नाले के ऊपर बना था। घाट के फेज दो के इस हिस्से के करीब पांच फीट गहराई में धंसने से पांच लोगों को हल्की चोटें आईं हैं। तीन ग्राहकों और दोनों स्टाफ के अचानक गड्ढे में गिरने से उनके पैरों में चोटें आईं। गुमटी के गड्ढे में जाने से उसमें रखा गैस सिलेंडर लीक करने लगा। इसके कारण वहां और भी दहशत हो गई। हालांकि मौके पर पहुंचे बाउंसरों, सुरक्षा गार्डों ने सिलेंडर का नॉब बंद किया और गड्ढे में गिरे लोगों को निकाला।

प्रत्यक्ष दर्शी दुकानदार विशाल कुमार नेबताया कि तेज आवाज के साथ देखते ही देखते बड़ा हिस्सा धंस गया। कुछ समय के लिए तो लगा कि भूकंप आया है। मेरी दुकान भी टूट गई। देर शाम स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। नमो घाट का संचालन रोबस्ट एसोसिएट करती है। स्थानीय लोगों ने कहा कि तीन दिन पहले हल्का सा धंसाव होने पर कंपनी को जानकारी दी गई थी लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
नमोघाट का निर्माण
45 करोड़ रुपये से हुआ है निर्माण
नमो घाट फेज दो का निर्माण आदिकेशव घाट तक कराया गया है। इस पर 45 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। पिछले साल उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ ने इसका उद्घाटन किया था। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड ने कार्यदाई संस्था प्रीति बिल्डकॉन को इसके निर्माण का जिम्मा सौंपा था। नगर आयुक्त अक्षत वर्मा के अनुसार नमो घाट फेज दो के एक हिस्से के धंसने की जांच कराई जाएगी। निर्माण करने वाली कंपनी को इसकी मरम्मत करने का निर्देश दिया गया है।
इस समय वाराणसी में पर्यटकों को सबसे ज्यादा नमो घाट ही लुभा रहा है। बनारस के किसी भी घाट पर जाना हो तो वीवीआईपी भी इसी घाट से स्टीमर और क्रूज की सवारी करते हैं। यही एकमात्र घाट है जहां गंगा के सबसे करीब तक वाहन आ जा सकते हैं। घाट पर है दर्जनों कारों और दो पहिया वाहनों के लिए पार्किग भी बनाई गई है। यहां बने नमस्ते वाले स्कल्पचर काशी के सबसे बड़े सेल्फी प्वाइंट भी हैं। देश-विदेश से बनारस आने वाले पर्यटक इस घाट का नजारा लेने जरूर आते हैं। यहां से सुबह-ए-बनारस का अलौकिक नजारा देखने को मिलता है। यह बनारस का इकलौता घाट है जहां पर हेलीपैड भी बनाया गया है। बहुत जल्द यहां से अयोध्या और अन्य जिलों के लिए हेलीकाफ्टर सेवा भी शुरू करने की योजना है।

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